
लाइफस्टाइल डेस्क। युवाओं में तेजी से बढ़ते हृदय रोग गंभीर चिंता का विषय है। भारत में हृदय संबंधी रोग कुल मौतों का लगभग 28.9% हैं और वैश्विक स्तर पर दिल के दौरे से होने वाली मौतों का 20% हिस्सा भारत से है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीयों में दिल की बीमारियां 5 से 10 साल पहले यानी कम उम्र में ही विकसित हो रही हैं, और अब हर 5 में से एक हार्ट अटैक का मरीज 40 साल से कम उम्र का मिल रहा है।
कम उम्र में हार्ट अटैक के इन मामलों के पीछे तेजी से होता शहरीकरण, मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप, गलत खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, 45 वर्ष से कम उम्र के मामलों में धूम्रपान एक बहुत बड़ा जोखिम कारक है, और युवा पीड़ितों में पुरुषों की संख्या अधिक है। इसके अलावा, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसी समस्याएं अक्सर बिना किसी शुरुआती लक्षण के चुपचाप शरीर में पनपती हैं।

क्या वजह है कि 30 साल के युवाओं को भी चपेट में ले रही है हार्ट की बीमारियां?
इस खतरे से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है। लोगों को साल में कम से कम एक बार अपने ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवानी चाहिए।
हालांकि, हर व्यक्ति के लिए फास्टिंग लिपिड टेस्ट जरूरी नहीं होता और रिपोर्ट की सही व्याख्या उम्र व जोखिम के आधार पर डाॅक्टर से ही करवानी चाहिए।
तंबाकू और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं, आहार में नमक, चीनी और अनहैल्दी फैट का सेवन घटाएं, पर्याप्त नींद लें और रोजाना शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
Dr. राकेश जैन, कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के दिनों में एक्यूआई पर नजर रखें और सावधानी बरतें। सही दिनचर्या अपनाकर इन खतरों को टाला जा सकता है।