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एक क्लिक की चूक, जीवनभर की परेशानी, इसलिए जरूरी है 'सेफ क्लिक 2.0', जानें कैसे करता है काम

डिजिटल युग में एक मोबाइल फोन आज बैंक, पहचान पत्र, निजी दस्तावेज और परिवार की यादों का खजाना बन चुका है। कई बार बच्चे मोबाइल चलाते समय अनजाने में ऐसी फ...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 09:31:54 AM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 09:31:54 AM (IST)
एक क्लिक की चूक, जीवनभर की परेशानी, इसलिए जरूरी है 'सेफ क्लिक 2.0', जानें कैसे करता है काम
जानकारी देते अंजुल अयंक मिश्रा, सीएसपी, सेफ क्लिक 2.0 नोडल अधिकारी। नईदुनिया

HighLights

  1. साइबर अपराध से पहले सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
  2. डिजिटल इंडिया के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े
  3. अपराधी तकनीक से नए तरीके से लोगों को जाल में फंसा रहे

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मोबाइल यदि किसी साइबर अपराधी के हाथ लग जाए तो कुछ मिनटों में वर्षों की कमाई और निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में एक छोटी-सी लापरवाही, जैसे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना या एपीके फाइल डाउनलोड करना, जीवनभर की परेशानी का कारण बन सकती है।

जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच

नईदुनिया कार्यालय में आयोजित नईदुनिया विमर्श में साइबर सुरक्षा पर आयोजित विशेष संवाद में बरगी सीएसपी एवं सेफ क्लिक 2.0 अभियान के नोडल अधिकारी अंजुल अयंक मिश्रा ने कहा कि डिजिटल इंडिया के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर नए-नए तरीके से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।


संदिग्ध काल, लिंक, ऐप और आनलाइन ठगी पहचान सकें

मध्य प्रदेश पुलिस का सेफ क्लिक 2.0 अभियान इसी उद्देश्य से चलाया जा रहा है, ताकी लोग संदिग्ध काल, लिंक, ऐप और आनलाइन ठगी के तरीकों को पहचान सकें। कार्यक्रम में उप निरीक्षक विनोद कुमार पाठक और नीरज सिंह नेगी ने भी साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी।

अब पढ़े-लिखे और संपन्न लोग भी बन रहे शिकार

अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि अब साइबर ठग केवल कम पढ़े-लिखे लोगों को ही निशाना नहीं बनाते। डाक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, सरकारी अधिकारी और बड़े निवेशक भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। विशेष रूप से निवेश (इनवेस्टमेंट) के नाम पर ठगी तेजी से बढ़ी है।

विश्वास बनने के बाद लाखों रुपये निवेश के नाम पर ऐंठते हैं

ठग फर्जी वेबसाइट, नकली कंपनियां और आकर्षक प्रोफाइल तैयार कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। कई बार प्रॉक्सी कंपनियों के माध्यम से पूरा नेटवर्क संचालित किया जाता है, जिससे सब कुछ वास्तविक प्रतीत होता है। विश्वास बनने के बाद लाखों रुपये निवेश के नाम पर ऐंठ लिए जाते हैं।

फाइल बन रही सबसे बड़ा खतरा

विशेषज्ञों ने बताया कि इन दिनों साइबर अपराधी आरटीओ चालान, बिजली बिल, बैंक केवाईसी, गैस सब्सिडी, पार्सल डिलीवरी और सरकारी योजना के नाम पर एपीके फाइल भेज रहे हैं। जैसे ही उपयोगकर्ता इसे डाउनलोड करता है, मोबाइल का नियंत्रण अपराधियों के हाथ में पहुंच सकता है।

पूरा परिवार साइबर ठगी का शिकार हो सकता है

बैंक खाते, ओटीपी, मैसेज और निजी जानकारी तक उनकी पहुंच बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे मोबाइल चलाते समय अनजाने में ऐसी फाइल या लिंक खोल देते हैं, जिससे पूरा परिवार साइबर ठगी का शिकार हो सकता है।

तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में जिन अपराधों में तेजी आई है, उनमें शामिल हैं:

  • फर्जी बैंक कॉल और ओटीपी फ्रॉड
  • ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी
  • डिजिटल अरेस्ट
  • ऑनलाइन लोन ऐप फ्रॉड
  • फिशिंग लिंक
  • सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग
  • रैनसमवेयर और मालवेयर हमला
  • पहचान की चोरी (आईडेंटिटी थेफ्ट)
  • साइबर स्टॉकिंग
  • वित्तीय धोखाधड़ी

सेफ क्लिक 2.0 अभियान का उद्देश्य

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि:

  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
  • मोबाइल में केवल अधिकृत ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
  • ओटीपी, बैंक विवरण और पासवर्ड किसी से साझा न करें।
  • स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करने से पहले पूरी जांच करें।
  • सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक करने से बचें।
  • संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर तत्काल सत्यापन करें।

दो घंटे बेहद महत्वपूर्ण

अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। साइबर अपराध होने के बाद शुरुआती दो घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शिकायत मिलने पर कई मामलों में ठगी गई राशि को फ्रीज या वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आवश्यकता होने पर निकटतम पुलिस थाने में भी सूचना दें।

साइबर कमांडो होंगे तैयार

विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस विशेष रूप से प्रशिक्षित साइबर कमांडो तैयार कर रही है। इनका उद्देश्य आधुनिक तकनीक से होने वाले अपराधों की जांच और रोकथाम को और मजबूत बनाना है।

दिलाई साइबर सुरक्षा की शपथ

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाएंगे और दूसरों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करेंगे।

साइबर सुरक्षा के पांच नियम

  • किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक न करें।
  • बैंक कभी फोन पर ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता।
  • केवल अधिकृत ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
  • साइबर ठगी होते ही तुरंत 1930 पर काल करें।
  • इंटरनेट मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें।

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