
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मोबाइल यदि किसी साइबर अपराधी के हाथ लग जाए तो कुछ मिनटों में वर्षों की कमाई और निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में एक छोटी-सी लापरवाही, जैसे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना या एपीके फाइल डाउनलोड करना, जीवनभर की परेशानी का कारण बन सकती है।
नईदुनिया कार्यालय में आयोजित नईदुनिया विमर्श में साइबर सुरक्षा पर आयोजित विशेष संवाद में बरगी सीएसपी एवं सेफ क्लिक 2.0 अभियान के नोडल अधिकारी अंजुल अयंक मिश्रा ने कहा कि डिजिटल इंडिया के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर नए-नए तरीके से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है।
मध्य प्रदेश पुलिस का सेफ क्लिक 2.0 अभियान इसी उद्देश्य से चलाया जा रहा है, ताकी लोग संदिग्ध काल, लिंक, ऐप और आनलाइन ठगी के तरीकों को पहचान सकें। कार्यक्रम में उप निरीक्षक विनोद कुमार पाठक और नीरज सिंह नेगी ने भी साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी।
अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि अब साइबर ठग केवल कम पढ़े-लिखे लोगों को ही निशाना नहीं बनाते। डाक्टर, इंजीनियर, व्यापारी, सरकारी अधिकारी और बड़े निवेशक भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। विशेष रूप से निवेश (इनवेस्टमेंट) के नाम पर ठगी तेजी से बढ़ी है।
ठग फर्जी वेबसाइट, नकली कंपनियां और आकर्षक प्रोफाइल तैयार कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। कई बार प्रॉक्सी कंपनियों के माध्यम से पूरा नेटवर्क संचालित किया जाता है, जिससे सब कुछ वास्तविक प्रतीत होता है। विश्वास बनने के बाद लाखों रुपये निवेश के नाम पर ऐंठ लिए जाते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि इन दिनों साइबर अपराधी आरटीओ चालान, बिजली बिल, बैंक केवाईसी, गैस सब्सिडी, पार्सल डिलीवरी और सरकारी योजना के नाम पर एपीके फाइल भेज रहे हैं। जैसे ही उपयोगकर्ता इसे डाउनलोड करता है, मोबाइल का नियंत्रण अपराधियों के हाथ में पहुंच सकता है।
बैंक खाते, ओटीपी, मैसेज और निजी जानकारी तक उनकी पहुंच बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे मोबाइल चलाते समय अनजाने में ऐसी फाइल या लिंक खोल देते हैं, जिससे पूरा परिवार साइबर ठगी का शिकार हो सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में जिन अपराधों में तेजी आई है, उनमें शामिल हैं:
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि:
अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। साइबर अपराध होने के बाद शुरुआती दो घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शिकायत मिलने पर कई मामलों में ठगी गई राशि को फ्रीज या वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। आवश्यकता होने पर निकटतम पुलिस थाने में भी सूचना दें।
विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस विशेष रूप से प्रशिक्षित साइबर कमांडो तैयार कर रही है। इनका उद्देश्य आधुनिक तकनीक से होने वाले अपराधों की जांच और रोकथाम को और मजबूत बनाना है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाएंगे और दूसरों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करेंगे।
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