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चमकदार पैकेटों के मायाजाल से खराब न करें सेहत, जानिए पैकेज्ड फूड का पूरा सच, सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को दी सख्त हिदायत

भारत में बढ़ते मोटापे और गंभीर बीमारियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड पर 'फ्रंट-ऑफ-पैक' चेतावनी लेबल लगाने को लेकर FSSAI को सख्त अल्टीमेटम दिया...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 23 Aug 2026 12:19:58 PM (IST)Updated Date: Sun, 23 Aug 2026 12:26:18 PM (IST)
चमकदार पैकेटों के मायाजाल से खराब न करें सेहत, जानिए पैकेज्ड फूड का पूरा सच, सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को दी सख्त हिदायत
बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए FSSAI को सख्त निर्देश। (फाइल फोटो)

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बाजार में उपलब्ध चमकदार पैकेटों में बंद भोजन हमारी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। भारत का पैकेज्ड फूड बाजार 137.25 अरब डॉलर (लगभग 11.87 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हम जो खा रहे हैं, क्या वास्तव में उसका सच जानते हैं? खासकर तब, जब देश के 4 करोड़ से अधिक मोटे और अत्यधिक वजन (ओवरवेट) वाले बच्चों को भ्रामक विज्ञापनों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी फटकार और सरकार को अल्टीमेटम

हाल ही में पैकेज्ड फूड पर 'फ्रंट-ऑफ-पैक' (Front-of-Pack) चेतावनी लेबल लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से सवाल किया कि बच्चों में बढ़ते मोटापे और जंक फूड की लत के बावजूद चेतावनी लेबल लागू करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है?


कोर्ट ने सरकार को यह भी चेताया कि नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। यह नीति बड़ी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट्स के दबाव के कारण अटकी हुई है? अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यदि सरकार जल्द नियम तय नहीं करती, तो कोर्ट स्वयं आदेश पारित करेगा।

आंकड़ों के मुताबिक यह स्वास्थ्य संकट

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, भारत में कुल बीमारियों के बोझ का 56.4% हिस्सा अस्वास्थ्यकर आहार और खराब जीवनशैली से जुड़ा है। पैकेटबंद 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड' भोजन के अत्यधिक सेवन से हृदय रोगों के जोखिम में 10% की वृद्धि हो जाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पैकेटबंद भोजन सीधे तौर पर टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और मानसिक विकारों को ट्रिगर कर रहा है।

पैकेट का सच, भ्रामक दावों से सावधान रहें

  • पैकेट के सामने का हिस्सा 'Natural', 'Multigrain', 'High Fiber' और 'Baked' जैसे लुभावने शब्दों से ग्राहकों को आकर्षित करता है। इससे सावधान रहे।
  • पैकेट को उलटकर पीछे लिखी पोषण तालिका को बारीकी से पढ़ें।
  • शुगर अक्सर केवल 'चीनी' के नाम से नहीं, बल्कि ग्लूकोज सिरप, फ्रक्टोज, डेक्सट्रोज, माल्टोडेक्सट्रिन और इन्वर्ट सिरप जैसे दर्जनों छिपे हुए नामों से मिलाई जाती है।

'फूड कॉन्शियसनेस' जगाना जरूरी

जो भोजन कभी सीधे खेतों से रसोई तक पहुंचता था, वह अब फैक्ट्रियों में आर्टिफिशियल रंगों, प्रिजर्वेटिव्स और स्टेबलाइजर्स के मेल से तैयार होने वाला उत्पाद बन चुका है। 'पारंपरिक' लिख देने भर से कोई पैकेज्ड उत्पाद सेहतमंद नहीं हो जाता। घर में बने ताजा खाने और महीनों तक केमिकल के सहारे सुरक्षित रखे गए प्रोसेस्ड फूड में जमीन-आसमान का अंतर है। अति-प्रसंस्कृत (Ultra-processed) भोजन में मिलाए गए स्वाद पेट भरने के बाद भी खाने की लत बनाए रखते हैं। हमें अपने और अपने बच्चों के स्वाद को प्राकृतिक मिठास (जैसे ताजे फल, सब्जियों) की ओर मोड़ना होगा।

भारतीय रसोई के स्वस्थ विकल्प

फास्ट फूड और जंक फूड के बजाय हमारी पारंपरिक भारतीय रसोई में पोषण से भरपूर ढेरों विकल्प मौजूद हैं:

  • भुने चने, मूंगफली और मुरमुरे
  • ढोकला और शकरकंद
  • बाजरा, ज्वार और अन्य मोटे अनाज (श्री अन्न)

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