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सिगरेट नहीं पीने वाले भी हो जाइए सावधान... पैसिव स्मोकिंग से हो रही है मौत, दुनिया में भारत का दूसरा स्थान, देखें पूरी स्टडी

Global Burden of Disease (GBD) Study 2023 की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में करीब 44.4 करोड़ लोग पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में हैं और 2023 में...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 03:13:28 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 03:13:28 PM (IST)
सिगरेट नहीं पीने वाले भी हो जाइए सावधान... पैसिव स्मोकिंग से हो रही है मौत, दुनिया में भारत का दूसरा स्थान, देखें पूरी स्टडी
भारत में पैसिव स्मोकिंग से मौतों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी। (AI जनरेटेड)

HighLights

  1. भारत में 44.4 करोड़ लोग पैसिव स्मोकिंग के शिकार हैं
  2. इसकी वजह से देश में 3.25 लाख से अधिक मौतें हुई हैं
  3. बच्चे और गैर-धूम्रपान करने वाले सबसे ज्यादा खतरे में

हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। आप खुद सिगरेट नहीं पीते, फिर भी तंबाकू का धुआं आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। घर, ऑफिस, सार्वजनिक जगह या किसी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने से लोग अनजाने में सेकंड-हैंड स्मोक यानी पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं।

अब एक नए विश्लेषण ने भारत में इस खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। Global Burden of Disease (GBD) Study 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में भारत में करीब 44.4 करोड़ लोग सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में थे। इतनी बड़ी संख्या के साथ भारत इस मामले में दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा।


पैसिव स्मोकिंग से भारत में 3.25 लाख से ज्यादा मौतें

रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत में 3,25,600 मौतों के लिए सेकंड-हैंड स्मोक को जिम्मेदार माना गया। खास बात यह है कि 1990 में यह आंकड़ा करीब 2,17,700 था। यानी करीब तीन दशक में पैसिव स्मोकिंग से जुड़ी मौतों में लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है।

यह खतरा सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। सिगरेट या तंबाकू के दूसरे उत्पादों से निकलने वाला धुआं आसपास मौजूद लोगों के शरीर में भी पहुंच सकता है।

दुनिया में 2.71 अरब लोग सेकंड-हैंड स्मोक की चपेट में

समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनियाभर में 2023 के दौरान करीब 2.71 अरब लोग सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आए। इनमें लगभग 76.7 करोड़ बच्चे, यानी 0 से 14 साल की उम्र के बच्चे शामिल थे।

GBD 2023 के अनुमान, दुनिया में सेकंड-हैंड स्मोक से करीब 16.6 लाख मौतें जुड़ी थीं। इसके अलावा इससे लगभग 4.48 करोड़ disability-adjusted life years (DALYs) का नुकसान हुआ।

सबसे ज्यादा खतरा किसे?

पैसिव स्मोकिंग का खतरा खास तौर पर उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • घर में धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रहने वाले लोग
  • धूम्रपान वाले कार्यस्थल पर रहने वाले कर्मचारी
  • सार्वजनिक जगहों पर लगातार तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने वाले लोग
  • बच्चे और किशोर
  • लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने वाले अन्य गैर-धूम्रपान करने वाले लोग

सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस व्यक्ति ने जिंदगी में कभी सिगरेट नहीं पी, वह भी सिर्फ आसपास के धुएं के कारण तंबाकू से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर सकता है।

बच्चों के लिए क्यों गंभीर है मामला?

दुनिया में सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आने वालों में करोड़ों बच्चे हैं। बच्चे खुद धूम्रपान नहीं करते, लेकिन घर या आसपास किसी दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान करने से वे लगातार तंबाकू के धुएं के संपर्क में आ सकते हैं।

यही वजह है कि पैसिव स्मोकिंग को केवल धूम्रपान करने वालों की समस्या नहीं, बल्कि परिवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चुनौती माना जाता है।

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