अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना और सुस्ती... कहीं ये PCOS या थायराइड की आहट तो नहीं? जानिए एक्सपर्ट्स की राय
कम उम्र की महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, अचानक बढ़ता वजन, चेहरे पर मुंहासे, थकान और अनचाहे बाल जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 22 Oct 2026 06:03:29 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Oct 2026 06:03:29 PM (IST)

हेल्थ डेस्क। कम उम्र की महिलाओं और युवतियों में अचानक वजन बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे (Acne), अनियंत्रित पीरियड्स (Irregular Periods) और लगातार शरीर में थकावट या सुस्ती छाए रहने जैसे लक्षणों को अक्सर सामान्य मानकर टाल दिया जाता है। भोपाल की हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. दीप्ति गुप्ता ने स्वास्थ्य परामर्श जारी करते हुए सचेत किया है कि ये शुरुआती लक्षण पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या थायराइड (Thyroid) संबंधी गंभीर हार्मोनल इमबैलेंस के हो सकते हैं।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, बदलती लाइफस्टाइल, खानपान में गड़बड़ी, शारीरिक गतिविधियों में कमी, अस्वस्थ दिनचर्या और बढ़ता तनाव महिलाओं के endocrine System को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, केवल वजन बढ़ने भर से इन बीमारियों की पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में लक्षण आपस में काफी मिलते-जुलते हैं।
PCOS और थायराइड के लक्षणों में अंतर
पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) के लक्षण-
- हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड्स का अनियमित या देरी से आना।
- चेहरे, ठोढ़ी (Jawline) और शरीर पर अनचाहे मोटे बालों (Hirsutism) का उगना।
- चेहरे पर जिद्दी मुंहासे निकलना।
- आगे चलकर गर्भधारण (Infertility/Pregnancy) में समस्याएं आना।
थाराइड (Hypothyroidism) के लक्षण-
- शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी से तेजी से वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म धीमा होना।
- हर समय अत्यधिक सुस्ती और थकावट महसूस होना।
- सामान्य मौसम में भी अधिक ठंड लगना।
- बालों का तेजी से झड़ना या पतले होना।
सही जांच और डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी?
डॉ. दीप्ति गुप्ता ने स्पष्ट किया कि दोनों बीमारियों के लक्षण एक-दूसरे से काफी मेल खाते हैं, इसलिए लक्षणों के लगातार बने रहने पर बिना देर किए किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) या एंडोक्राइनोलाजिस्ट (Endocrinologist) से परामर्श लेना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह पर थायराइड प्रोफाइल के लिए ब्लड टेस्ट (TSH Test) और पीसीओएस की पुष्टि के लिए आवश्यक हॉर्मोनल टेस्ट और पेल्विक अल्ट्रासाउंड (USG) कराया जाता है।
बचाव और रिकवरी के लिए लाइफस्टाइल में 4 बदलाव
- दवाओं के साथ-साथ लाइफस्टाइल में सुधार ही हार्मोनल संतुलन को सुधारने का उपाय है। इसके लिए -
- जंक फूड, रिफाइंड शुगर और प्रोसेस्ड खाने से परहेज करें; अपने आहार में हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन शामिल करें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट हल्की कसरत, वॉक या योग करें ताकि इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार हो।
- पर्याप्त नींद: रोजाना 7 से 8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण और गहरी नींद लें।
- तनाव प्रबंधन: मेडिटेशन या माइंडफुलनेस के जरिए मानसिक तनाव को नियंत्रित रखें।