
लाइफस्टाइल डेस्क। इंदौर में वर्किंग प्रोफेशनल्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लगातार काम की व्यस्तता के चलते न सिर्फ उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई है, बल्कि वे अपने स्वास्थ्य की ओर भी कम ध्यान दे पा रहे हैं। आफिस का लंबा समय, लगातार लैपटाप या मोबाइल पर काम करना और कई घंटे कुर्सी पर बैठे रहने का असर शरीर पर भी दिखाई देने लगा है।
ऐसे में कई लोग कम समय में शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए आयुर्वेद से जुड़ी थेरेपी का सहारा ले रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन थेरेपी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। खास बात यह है कि इनमें युवाओं की संख्या अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने वाले लोगों में गर्दन और कंधों की जकड़न सबसे आम समस्या बनकर सामने आ रही है।
लगातार मोबाइल और लैपटाॅप का उपयोग करने से गर्दन पर दबाव पड़ता है। इसके साथ ही कमर में दिक्कत, शरीर की मांसपेशियों में जकड़न और पैरों में भारीपन की शिकायत भी देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों की माने तो कई लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं और बीच में उठकर चलना-फिरना भी कम होता है। इससे शरीर में मांसपेशियों की थकान बढ़ती है।
काम का तनाव अलग से बना रहता है। ऐसे लोगों के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी आराम देने और शरीर की मांसपेशियों में तनाव कम करने के लिए उपयोग की जा रही हैं।
आयुर्वेद में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी समस्याओं के लिए भी कई तरह की थेरेपी हैं। कमर और रीढ़ से जुड़ी परेशानी में कटि वस्ति का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कमर के हिस्से पर विशेष तरीके से तेल रखा जाता है। वहीं घुटनों से जुड़ी परेशानी के लिए जानु वस्ति का इस्तेमाल किया जाता है। इनका उपयोग खासतौर पर दर्द और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी में किया जाता है।
विशेषज्ञ भारती सेन के अनुसार, व्यस्त जीवनशैली के कारण शारीरिक गतिविधि लगातार कम हो रही है। लोग कई घंटे लैपटाप के सामने बैठकर काम करते हैं। इसके बाद घर पर भी मोबाइल या दूसरे स्क्रीन का इस्तेमाल जारी रहता है। ऐसे में शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिल पाता। इसका असर सबसे पहले गर्दन, कंधे और कमर पर दिखाई देता है। लंबे समय तक बैठने से पैरों में भारीपन और मांसपेशियों में थकान भी महसूस हो सकती है।
- अभ्यंगम
- शिरोअभ्यंग
- शिरोधारा
- शिरोधारा के साथ अभ्यंगम
इनमें मिल रही राहत
- ब्लड सर्कुलेशन
- तनाव
- मांसपेशियों में जकड़न
- दर्द