
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। विश्व इतिहास में रिकोनक्विस्टा को सबसे लंबे संघर्षों में गिना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह युद्ध लगभग 781 वर्षों तक चला। इसकी शुरुआत 711 ईस्वी में हुई और इसका समापन 1492 ईस्वी में हुआ। यह संघर्ष आइबेरियन प्रायद्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए ईसाई राज्यों और मुस्लिम मूरों के बीच लड़ा गया था। वर्तमान समय में इस क्षेत्र में स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं।
711 ईस्वी में उत्तरी अफ्रीका से आई मुस्लिम सेनाओं ने जिब्राल्टर जलडमरूमध्य पार कर आइबेरियन प्रायद्वीप में प्रवेश किया। इसके बाद कुछ वर्षों के भीतर ही क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा उमय्यद मुसलमानों, जिन्हें मूर कहा जाता था, के नियंत्रण में आ गया।
मुस्लिम विस्तार के खिलाफ संगठित प्रतिरोध की शुरुआत 722 ईस्वी में हुई। ईसाई कुलीन नेता पेलेजियह ने कोवाडोंगा की लड़ाई में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इतिहासकार इस विजय को रिकोनक्विस्टा की वास्तविक शुरुआत मानते हैं। इसके बाद ईसाई राज्यों ने धीरे-धीरे अपने क्षेत्रों को पुनः हासिल करने का प्रयास शुरू किया।
रिकोनक्विस्टा कोई ऐसा युद्ध नहीं था जो लगातार 781 वर्षों तक बिना रुके चला हो। इस लंबे दौर में कई युद्ध, अस्थायी युद्धविराम, राजनीतिक गठबंधन और सत्ता परिवर्तन देखने को मिले।
संघर्ष के शुरुआती चरण में ईसाई राज्य अपेक्षाकृत कमजोर थे और वे मुख्य रूप से कोर्डोबा के खलीफा की शक्तिशाली सत्ता के विरुद्ध अपनी रक्षा करने में लगे रहे। समय के साथ मुस्लिम शासन कमजोर होने लगा। खलीफा का साम्राज्य टूटकर कई छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित हो गया, जिन्हें ताइफा कहा जाता था।
इस राजनीतिक विखंडन का लाभ उठाते हुए ईसाई राज्यों ने अपनी स्थिति मजबूत की। इसी क्रम में लास नवाज डे टोलोसा की लड़ाई में उन्हें बड़ी सफलता मिली। इस जीत ने मुस्लिम सैन्य शक्ति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया और संघर्ष की दिशा बदल दी।
15वीं शताब्दी तक आइबेरियन प्रायद्वीप में केवल ग्रेनाडा का मुस्लिम राज्य ही मूरों के नियंत्रण में बचा था। इस दौरान कैस्टिल की इसाबेला प्रथम और आरागॉन के फर्डिनेंड द्वितीय का विवाह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना साबित हुआ। इस वैवाहिक गठबंधन ने दो प्रमुख ईसाई राज्यों को एकजुट कर दिया।
1492 ईस्वी में दोनों शासकों की संयुक्त सेनाओं ने ग्रेनाडा को चारों ओर से घेर लिया। लंबे दबाव के बाद ग्रेनाडा के अंतिम मुस्लिम शासक मुहम्मद बारहवें ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने प्रसिद्ध अलहम्ब्रा महल की चाबियां ईसाई शासकों को सौंप दीं। इसी के साथ आइबेरियन प्रायद्वीप में लगभग 800 वर्षों से चला आ रहा मुस्लिम शासन समाप्त हो गया।
रिकोनक्विस्टा में ईसाई राज्यों की जीत ने क्षेत्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। युद्ध समाप्त होने के बाद स्पेन और पुर्तगाल मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्रों के रूप में उभरे। पूरे प्रायद्वीप में ईसाई सत्ता और संस्कृति का पुनर्स्थापन हुआ।
इतिहासकारों का मानना है कि इस परिवर्तन ने यूरोप को खोजों के युग की ओर बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि जिस वर्ष ग्रेनाडा का पतन हुआ, उसी वर्ष क्रिस्टोफर कोलंबस ने भी स्पेन के संरक्षण में अपनी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा शुरू की, जिसने विश्व इतिहास की दिशा बदल दी।