
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। देश के कई हिस्सों में कोरियन कल्चर का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी में भी म्यूजिक, पहनावा और फूड में कोरियन कल्चर नजर आ रहा है। गाजियाबाद में सुसाइड करने वाली तीन बहनें भी कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं। डिजिटल दुनिया के कारण यहां की भावी पीढ़ी कोरियन कल्चर को पसंद कर रही है।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि विदेशी पॉप संस्कृति का अंधानुकरण युवाओं को भावनात्मक रूप से कमजोर बना रहा है। इंटरनेट मीडिया को युवा बहुत फॉलो करते हैं। इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर कोरियन कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवा खासतौर पर जेन-जी काफी प्रभावित हो रहे हैं। अच्छी चीजें अपनाने में कोई बुराई नहीं, लेकिन बुरी चीजों को स्वीकार नहीं करना चाहिए।
कोरियन फूड की बढ़ रही डिमांड
मॉल और मार्केट में कोरियन फूड आइटम, के-पॉप म्यूजिक, के-ड्रामा, कोरियन कॉस्मेटिक्स और फुटवियर की मांग लगातार बढ़ रही है। फूड की बात करें तो बहुत से कार्ट सिर्फ कोरियन फूड के ही खुले हैं। फूड ब्लॉगर मयंक कर्रा का कहना है कि युवाओं को कोरियन नूडल्स, राम्यून, किमची, राइस केक और स्नैक्स काफी पसंद आने लगे हैं। अब इंस्टेंट बनने वाले फूड प्रोडक्ट भी ऑनलाइन मार्केट में उपलब्ध हैं। यहां तक कि शादियों में भी कोरियन फूड के स्पेशल स्टॉल लग रहे हैं।
ड्रेस और केयर प्रोडक्ट में कई वैरायटी
लोगों को कोरियन लोगों के बाल और स्किन काफी पसंद है। उनके बाल और स्किन काफी ग्लो करते हैं। मेकअप आर्टिस्ट अनुराधा दुबे का कहना है कि ब्यूटी स्टोर्स में कोरियन स्किनकेयर प्रोडक्ट में शीट मास्क, ग्लास स्किन सीरम और लिप टिंट युवतियों के बीच खास पसंद किए जा रहे हैं। फैशन डिजाइनर ऋषिता जैन का कहना है कि इन दिनों लूज शर्ट-टीशर्ट ट्रेंड में हैं, ये कोरियन ड्रेस हैं। रफल वाली ड्रेस, डेनिम शॉर्ट ड्रेस के अलावा कोरियन फैब्रिक भी बाजार में मिल रही है।
म्यूजिक और फैशन का असर
स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं के-पॉप ग्रुप्स के गाने, स्टाइल और हेयरकट को फॉलो कर रहे हैं। सोशल मीडिया रील्स पर कोरियन डांस स्टेप्स और मेकअप ट्यूटोरियल ट्रेंड कर रहे हैं। कई कैफे और इवेंट्स में ‘के-पॉप नाइट’ जैसे आयोजन भी होने लगे हैं।
के-मार्केट एक नजर में
एक सर्वे के अनुसार भारत में कोरियन लाइफस्टाइल के प्रोडक्ट की बिक्री तीन गुना बढ़ गई है। यह आयात 2020-23 के बीच बढ़ा है।
मेट्रो सिटी के अलावा देश के बड़े शहरों में 50 प्रतिशत कोरियन फूड की डिमांड यूथ करने लगे हैं।
देश के कई विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों में कोरियाई भाषा सीखने वालों की संख्या में पिछले पांच सालों में इजाफा हुआ है।
ग्लोबल हेल्थ सर्वे 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोरियाई पॉप स्ट्रीमिंग के यूजर्स की संख्या 18 करोड़ से ज्यादा है।
किशोरावस्था में बच्चे आकर्षित होते हैं
कला एवं वाणिज्य कन्या कॉलेज देवेंद्र नगर की समाजशास्त्र विभाग की प्रो. डॉ. मीना पाठक का कहना है कि किशोरावस्था में बच्चे अपनी पहचान तलाश रहे होते हैं। ऐसे में ग्लैमर और परफेक्ट लाइफस्टाइल दिखाने वाली डिजिटल सामग्री उन्हें जल्दी आकर्षित करती है। दूसरी संस्कृति या दूसरे देश की चीजें देखकर वे प्रभावित होकर उसे अपनाने लगते हैं।