
लाइफस्टाइल डेस्क। कई लोग मानते हैं कि स्मोकिंग तभी जानलेवा होती है जब वह एक लत बन जाए, लेकिन विशेषज्ञों ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया है। 'कभी-कभार' का धुआं भी आपके शरीर को उतनी ही गंभीर क्षति पहुंचा सकता है, जितनी एक चेन स्मोकर को।
हर साल मार्च के दूसरे बुधवार को 'नो स्मोकिंग डे' (No Smoking Day) मनाया जाता है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉ. अंकित जैन के अनुसार, तंबाकू में 7,000 से ज्यादा केमिकल्स होते हैं। इनमें से कई तत्व सीधे तौर पर 'कार्सिनोजेन्स' (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) हैं। जैसे ही आप सिगरेट का एक कश लेते हैं, ये रसायन तुरंत आपके फेफड़ों और खून में मिलकर अपना काम शुरू कर देते हैं।
सोशल स्मोकिंग या कभी-कभार धूम्रपान करने वालों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि विज्ञान की नजर में तंबाकू के धुएं की कोई 'सुरक्षित सीमा' (Safe Limit) नहीं है।
शोधों से यह साबित हो चुका है कि बहुत कम मात्रा में स्मोकिंग करने वालों में भी निम्नलिखित कैंसर का खतरा बढ़ जाता है...
कैंसर अक्सर शरीर में सालों तक चुपचाप विकसित होता है। तंबाकू से होने वाला आंतरिक नुकसान तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन भविष्य में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आता है। डॉक्टर की साफ राय है कि सेहत के लिए एकमात्र सुरक्षित विकल्प धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनाना ही है।
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