
लाइफस्टाइल डेस्क। नवरात्र या किसी भी धार्मिक उत्सव के दौरान उपवास रखने की परंपरा में अक्सर बिना नमक का भोजन (अलोना व्रत) प्राथमिक माना जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य और शरीर की वर्किंग के नजरिए से सोडियम का पूरी तरह से त्याग करना हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकता।
भोपाल की प्रसिद्ध डायटीशियन निधि पाण्डे के अनुसार, व्रत के दौरान खानपान में अचानक बदलाव और नमक के पूर्ण त्याग से पहले शरीर की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है।
साधारण/आयोडीन युक्त नमक में सोडियम होता है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी का संतुलन (Fluid Balance) बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा, नसों (Nerves) के एक्टिव कामकाज और मांसपेशियों के वर्किंग के लिए सोडियम आवश्यक तत्व है।
वहीं, शरीर में अचानक सोडियम का स्तर कम (Hyponatremia) होने पर कमजोरी, सिरदर्द, सुस्ती, चक्कर आना, थकावट और गंभीर मामलों में भ्रम (Confusion) जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
यदि आप नियमित रूप से जिम जाते हैं, योग या हैवी वर्कआउट करते हैं, तो पसीने के माध्यम से शरीर से प्रचुर मात्रा में सोडियम बाहर निकल जाता है। ऐसे में बिना नमक का व्रत (अलोना व्रत) रखने पर डिहाइड्रेशन और मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) हो सकती है।
यह सोचना गलत है कि नमक कम करने या न खाने से शरीर पानी रोककर मोटापा बढ़ाता है। शरीर में पानी का संतुलन कई जटिल कारकों पर निर्भर करता है, केवल नमक के कम-ज्यादा होने से स्थायी मोटापा नहीं बढ़ता।
बिना नमक का व्रत हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक हो, यह आवश्यक नहीं है, लेकिन अचानक और बिना तैयारी के नमक बंद करना स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
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