
लाइफस्टाइल डेस्क। पहले कोलन कैंसर को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30 के आसपास के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और जांच करा ली जाए, तो इलाज आसान और ज्यादा असरदार हो सकता है।
समस्या यह है कि काम के दबाव और फास्ट लाइफस्टाइल के चलते युवा अक्सर इन संकेतों को गैस, एसिडिटी या सामान्य पेट की परेशानी समझकर टाल देते हैं। आइए जानते हैं
अगर 2–3 हफ्तों से ज्यादा समय तक बार-बार दस्त लगना, लंबे समय तक कब्ज रहना, स्टूल का बहुत पतला होना या उसकी बनावट में बदलाव दिखे, तो इसे केवल डाइट की समस्या न समझें। यह आंतों में सूजन, रुकावट या किसी शुरुआती ग्रोथ का संकेत हो सकता है, खासकर युवाओं में।
कभी-कभार गैस या एसिडिटी सामान्य है, लेकिन अगर पेट में लगातार दर्द, ऐंठन या सूजन बनी रहे और दवाओं से भी आराम न मिले, तो इसे गंभीरता से लें। साथ में भूख कम लगना या खाना खाने के बाद भारीपन महसूस होना भी चेतावनी संकेत हो सकता है।
अक्सर युवा स्टूल में खून देखकर इसे बवासीर मान लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। चमकीला लाल, गहरा लाल या काले रंग का स्टूल अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं—यह कोलन कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
पूरी नींद के बाद भी थकान, हल्की मेहनत में सांस फूलना या चक्कर आना एनीमिया का संकेत हो सकता है, जो आंतों में अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण भी हो सकता है। कई युवा इसे स्ट्रेस या खराब लाइफस्टाइल मानकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ सकती है।
बिना डाइट या एक्सरसाइज के अचानक वजन घटने लगे, तो यह शरीर का अलर्ट है। कैंसर की स्थिति में न्यूट्रिशन ठीक से अवशोषित नहीं हो पाता और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। 1-2 महीने में लगातार वजन घट रहा हो, तो जांच जरूरी है।
30 की उम्र में शरीर के छोटे-छोटे बदलावों को हल्के में न लें। समय पर पहचान और जांच से कोलन कैंसर का इलाज संभव है। किसी भी लक्षण के बने रहने पर तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लक्षण पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।