रोज 30 मिनट सुरों की संगत से मन के रोग 30 प्रतिशत हो सकते हैं कम
भारतीय शास्त्रीय संगीत में हर प्रहर के अनुसार रागों को निर्धारित किया गया है। वास्तव में इसके पीछे जो विज्ञान छुपा है, उसका सीधा संबंध मानव मन-मस्तिष्...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 01:56:41 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 01:57:17 PM (IST)
शास्त्रीय संगीत की सभा में प्रस्तुति देते युवा कलाकार। (फाइल फोटो)HighLights
- अवसाद, तनाव, अनिद्रा, भूलने की बीमारी सहित जीवन शैली से जुड़े कई रोगों के लिए लाभदायक है संगीत सुनना
- वास्तव में इसके पीछे जो विज्ञान छुपा है, उसका सीधा संबंध मानव मन-मस्तिष्क और सेहत से है
- आज मेडिकल साइंस में भी कई रोगों को दूर करने के लिए संगीत की मदद ली जा रही है
हर्षल सिंह राठौड़, नईदुनिया, इंदौर। भारतीय शास्त्रीय संगीत में हर प्रहर के अनुसार रागों को निर्धारित किया गया है। वास्तव में इसके पीछे जो विज्ञान छुपा है, उसका सीधा संबंध मानव मन-मस्तिष्क और सेहत से है। आज मेडिकल साइंस में भी कई रोगों को दूर करने के लिए संगीत की मदद ली जा रही है, इसे नाम दिया गया है ‘म्यूजिक थेरेपी’।
म्यूजिक थेरेपी मरीज को केवल संगीत सुनाकर ही नहीं बल्कि गाकर, साज बजाकर, गीत लिखकर और संगीत सुनते-सुनते अन्य रचनात्मक कार्य कराकर भी दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि हर व्यक्ति प्रतिदिन करीब 30 मिनट उचित संगीत सुने तो कई रोगों को 30 से 40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है और कई रोगों से दूर भी रहा जा सकता है।
वर्तमान में जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियां जकड़ रही हैं। इनमें अवसाद, तनाव, पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रेस डिसआर्डर (ट्रामा), अनिद्रा, एकाग्रता की कमी, डिमेंशिया आदि प्रमुख हैं। अमूमन देखा जाता है कि लोग संगीत तो सुनते हैं, पर वे इस बात का ध्यान नहीं रखते कि किस रोग में, किस वक्त किस तरह का संगीत सुना जाए। मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार यह भी देखा गया है कि अवसाद से ग्रसित व्यक्ति उदासी भरे गीत सुनता है और उसकी उदासी इतनी बढ़ जाती है कि कई बार वह आत्महत्या तक कर बैठता है, जबकि इसके विपरीत यदि वह खुशनुमा गीत सुने तो हैप्पी हार्मोन स्रावित होंगे जो उसे खुश रखेंगे।
रोग के अनुरूप सुने संगीत
- तनाव: साज आधारित शास्त्रीय संगीत सुनें। यदि फिल्मी गीत सुनना है तो भी इंस्ट्रूमेंटल सुनें और आवाज कम हो। यह तनाव में होने वाली बेचैनी, घबराहट को कम करता है। मंत्रों का उच्चारण और भजन सुनना भी लाभकारी होगा।
- अवसाद: खुशनुमा संगीत सुनें। ये लोग गीत लिखें भी ताकि मन में दबी बातें शब्दों में आ जाएं। खुशनुमा गीत सुनने पर हैप्पी हार्मोन निकलते हैं जो अवसाद कम करने में मददगार होते हैं।
- पोस्ट ट्रामैटिक स्ट्रेस डिसआर्डर (ट्रामा) : इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक ही सुनें। गीत के बोल से कई बार ये खुद को जोड़ लेते हैं जिससे परेशानी बढ़ जाती है। सैक्सोफोन सुनना ज्यादा लाभदायक होता है, पर आवाज मध्यम ही हो।
- डिमेंशिया: यह समस्या अमूमन 60 साल की उम्र के बाद ही होती है। भूलने की बीमारी पर काबू पाने के लिए वे गीत सुनें जिससे अपनापन महसूस हो। यह संगीत इनके लिए सनडाउनिंग बिहेवियर कम करने में भी मदद करता है।
अनिद्रा: शास्त्रीय या इंस्ट्रूमेंटल साफ्ट म्यूजिक सुनें। इस संगीत की तरंग दिमाग के विभिन्न भागों में जाकर आराम देती है। आधा घंटा सुनने से नींद अच्छी आएगी। कमरे में अंधेरा करके संगीत सुनें।
एकाग्रता: यदि वक्त नहीं तो इंस्ट्रूमेंटल 15 मिनट भी सुनें तो भटकाव नहीं होगा। समय के अनुसार संगीत
- सूर्योदय से पूर्व और ठीक बाद: डिवोशनल, अध्यात्म और ब्रेन को अलर्ट रखने वाले हों। रागों में ललित, भटियार, भैरवी, तोड़ी, जोगियार आदि।
- दोपहर: ऐसे गीत सुने जो आपका फोकस बढ़ाएं, सचेत रखें। राग बिलावल, कोमल ऋषभ असावरी, वृंदावनी सारंग, सुद्ध सारंग सुनना चाहिए।
- शाम: आराम का अनुभव कराने वाले गीत सुनें। भीमपलासी, पटदीप, मुल्तानी, मधुवंती, यमन, पूरिया धनाश्री राग सुनना लाभकारी होगा।
- रात: डिवोशनल या रोमांटिक सांग सुने। केदार, जयजयवंती, बागेश्री, तिलक कामोद आदि राग सुनना चाहिए।
म्यूजिक थेरेपी के कई आयाम हैं
म्यूजिक थेरेपी के कई आयाम हैं। मनोरोग होने पर दवाई और काउंसलिंग के साथ म्यूजिक थेरेपी को अपनाकर कई रोगों का उपचार किया जा रहा है। यदि प्रतिदिन 30 मिनट संगीत सुना जाए तो कई रोगों को 30 प्रतिशत कम किया जा सकता है। मस्तिष्क के विभिन्न भागों तक संगीत पहुंचकर जो तरंगे पैदा करता है उससे संवेदनाओं पर काबू पाने में मदद मिलती है। संगीत सेल्फ कंट्रोल और डिसीजन मेकिंग तक के लिए मददगार है। संगीत से मस्तिष्क की बीटा वेव बढ़ती है जो आराम की अनुभूति कराती है। -डा. वैभव चतुर्वेदी, मनोरोग विशेषज्ञ
उदासी व फास्ट बीट वाला संगीत न सुनें
भारतीय शास्त्रीय संगीत में समय के अनुसार राग निर्धारित हैं। यदि उसके अनुरूप ही संगीत सुना जाए तो इसका शरीर व मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में तनाव और उदासी दो समस्या सबसे ज्यादा बढ़ रही हैं और इसे कम करने के लिए उदासी व फास्ट बीट वाला संगीत न सुनें। बेहतर होगा यदि सुबह-सुबह अध्यात्म और ब्रेन को अलर्ट करने वाला संगीत सुनें और रात में डिवोशनल और रोमांटिक म्यूजिक सुनें। शास्त्रीय संगीत या उसपर आधारित गीत सुनना भी लाभकारी हो सकता है। -डा. निवृत्ति मिश्रा, मनोरोग विशेषज्ञ