
लाइफस्टाइल डेस्क। बाजार से फल खरीदते समय या मंदिर में पूजा की थाली सजाते वक्त हमारा ध्यान कभी इस बात पर नहीं जाता कि सामने रखा फल किस मिट्टी की खुशबू समेटे हुए है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश का एक ऐसा कोना भी है, जहां की धरती से निकलने वाला केला सिर्फ भारतीय मंडियों की ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार खाड़ी देशों (Gulf Countries) के डाइनिंग टेबल की भी शान बढ़ा रहा है। हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर की, जिसे अब मध्य प्रदेश का 'बनाना हब' (केला केंद्र) कहा जाने लगा है।
बुरहानपुर अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति और उपजाऊ मिट्टी के कारण केले की खेती के लिए वरदान साबित हुआ है। जिले की लगभग 1.03 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से अकेले 16 हजार हेक्टेयर हिस्से पर सिर्फ केले के बागान लहलहा रहे हैं। व्यापक स्तर पर होने वाली इस पैदावार ने बुरहानपुर को पूरे प्रदेश में केले की एक अनूठी पहचान दे दी है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने इसे 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (एक जिला, एक उत्पाद - ODOP) योजना के तहत चुना है।
यहां के खेतों में मुख्य रूप से 'ग्रैंड नैने' (Grand Naine) प्रजाति का केला उगाया जाता है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, स्वाद और लंबी शेल्फ-लाइफ (जल्दी खराब न होने का गुण) के कारण इस वैरायटी की मांग देश-विदेश में बहुत ज्यादा है।
कभी स्थानीय स्तर पर व्यापार करने वाले बुरहानपुर के प्रगतिशील किसान जैसे राजेश पाटिल और अमोल मावले अब एक वैश्विक ब्रांड बन चुके हैं। लंबे समय तक दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी फसल बेचने के बाद, अब ये किसान सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार को निर्यात कर रहे हैं। खाड़ी देशों में बुरहानपुर के केले की जबरदस्त मांग के कारण किसानों को अपनी फसल के बेहतरीन दाम मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।
उद्यानिकी विभाग की रिपोर्ट भी इस सफलता की तस्दीक करती है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इस क्षेत्र से केले के उत्पादन और निर्यात ग्राफ में उल्लेखनीय उछाल आया है। प्रदेश का कुल केला निर्यात 14.36 लाख टन की सीमा को लांघकर अब 15.71 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा है, जिसका सीधा आर्थिक लाभ स्थानीय किसानों की जेब तक पहुंच रहा है।
अगर पूरे प्रदेश की बात करें तो मध्य प्रदेश में केले का कुल उत्पादन 5.23 लाख मीट्रिक टन से अधिक है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 14.36 प्रतिशत हिस्सा है। इस महा-उत्पादन में बुरहानपुर के साथ-साथ खंडवा, धार और बड़वानी जिले भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
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चुनौतियां और संभावनाएं: इस सुनहरे सफर के बीच स्थानीय किसानों को कुछ बुनियादी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुरहानपुर में आधुनिक पैकेजिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज (शीत गृह) और सुगम एक्सपोर्ट चैनल जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर और सुदृढ़ कर दी जाएं, तो यहां का केला आने वाले समय में वैश्विक फल बाजार का बेताज बादशाह बन सकता है।