
लाइफस्टाइल डेस्क। खाद्य सुरक्षा विभाग (एफएसएसएआइ) द्वारा हाल ही में जिले में कार्रवाई करते हुए मिलावटी घी बेचने वाले कई ब्रांड्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं और कुछ ब्रांड्स को पूरी तरह बैन भी कर दिया गया है। ऐसे में यदि आप भी अपनी सेहत और स्वाद के लिए बाजार से घी खरीद रहे हैं, तो सावधान रहने की जरूरत है।
उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी और सेहत के नुकसान से बचाने के लिए एफएसएसएआई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर घर पर ही घी की शुद्धता जांचने का बेहद आसान तरीका बताया है।
त्योहारों और आम दिनों में शुद्ध घी की आड़ में सस्ते वनस्पति तेल या घटिया स्तर की चर्बी मिलाकर बेचा जा रहा है। ऐसा मिलावटी घी न केवल घी के प्राकृतिक स्वास्थ्य लाभों को खत्म कर देता है, बल्कि लंबे समय तक इसके सेवन से पाचन तंत्र खराब होने और दिल की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
आवश्यक सामग्री:
- एक मिलीलीटर पिघला हुआ घी
- एक मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड
- आधा चम्मच पिसी हुई चीनी
- एक छोटी पारदर्शी कांच की टेस्ट ट्यूब या शीशी
- टेस्ट ट्यूब में एक मिलीलीटर पिघला हुआ घी लें।
- इसमें एक मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड और आधा चम्मच चीनी मिलाएं।
- इस पूरे मिश्रण को लगभग दो मिनट तक अच्छी तरह हिलाएं।
- इसके बाद टेस्ट ट्यूब को बिना हिलाए दो से तीन मिनट के लिए स्थिर छोड़ दें, ताकि एसिड और घी की परतें अलग हो जाएं।
- शुद्ध घी: यदि नीचे मौजूद एसिड वाली परत के रंग में कोई बदलाव नहीं होता है, तो घी पूरी तरह शुद्ध है।
- मिलावटी घी: यदि नीचे की एसिड परत का रंग बदलकर गुलाबी या गहरा लाल हो जाता है, तो उसमें वनस्पति वसा या मिलावट मौजूद है।
चीनी और हाइड्रोक्लोरिक एसिड आपस में मिलकर फरफ्यूरल नाम का केमिकल कंपाउंड बनाते हैं। यह कंपाउंड वनस्पति या तिल के तेल में मौजूद विशेष घटकों के साथ क्रिया करके गहरा लाल या गुलाबी रंग देता है। शुद्ध देसी घी में ये घटक नहीं होते, इसलिए रंग में कोई परिवर्तन नहीं आता।
- एफएसएसएआई लेबल: हमेशा एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और सर्टिफाइड ब्रांड का पैकेट ही खरीदें।
- अत्यधिक सस्ते दाम से बचें: शुद्ध घी की निर्माण लागत अधिक होती है, बाजार दर से बहुत कम कीमत वाले घी में मिलावट की आशंका ज्यादा रहती है।
- सुगंध और टेक्सचर: शुद्ध देसी घी का टेक्सचर स्वाभाविक रूप से दानेदार और सुगंध हल्की व सुखद होती है।