
लाइफस्टाइल डेस्क। प्रतिवर्ष एक अक्टूबर को दुनियाभर में विश्व शाकाहार दिवस मनाया जाता है। बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण बढ़ रही बीमारियों के दौर में शहर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने नागरिकों से अपनी दिनचर्या में सात्विक और शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने की कहते हैं।
भारत में खानपान की विविधता के बीच शाकाहार की अपनी अलग पहचान है। देश में बड़ी संख्या में लोग मांसाहार से दूरी रखते हैं या कुछ विशेष दिनों और परिस्थितियों में मांसाहार नहीं करते।
प्यू नामक एक संस्था के भारत में किए गए सर्वे के अनुसार 39 प्रतिशत वयस्क खुद को शाकाहारी बताते हैं, जबकि 81 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में मांसाहार पर प्रतिबंध रखते हैं। यानी शाकाहारी भोजन केवल खानपान की पसंद नहीं, बल्कि बड़ी आबादी की रोजमर्रा की भोजन संस्कृति का हिस्सा है।

शाकाहार दिवस इसकी शुरुआत वर्ष 1977 में नार्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसायटी द्वारा की गई थी और 1978 में अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ ने इसे समर्थन दिया था। इसका उद्देश्य शाकाहारी जीवनशैली के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय, नैतिक और मानवीय लाभों के बारे में जागरूकता फैलाना है।
विश्व में सबसे अधिक 39 प्रतिशत शाकाहारी भारत में हैं। भारत के बाद मैक्सिको में 19 प्रतिशत, ब्राजील में 14 प्रतिशत, ताइवान में 13.5 प्रतिशत और इजराइल में13 प्रतिशत है।
उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश में शाकाहारी आबादी का प्रतिशत काफी अधिक 50 से 75 प्रतिशत है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में मांसाहारी आबादी का अनुपात अधिक है। प्यू संस्था के मुताबिक देश में जैन कम्युनिटी 92 प्रतिशत शाकाहारी है। जहां तक ग्वालियर की बात है तो यहां पर 60 से 75 प्रतिशत लोग शाकाहारी हैं। यही वजह है कि शहर में 90 प्रतिशत से अधिक शाकाहारी रेस्टोरेंट व होटल हैं। यहां पर सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक के खाने का मैन्यू में शाकाहारी व्ययंजन रहते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शाकाहार का पूर्ण लाभ उठाने के लिए केवल तला-भुना या जंक फूड न खाएं। अपनी दैनिक थाली में संतुलित रूप से दालें, पनीर, सोयाबीन, ताजे फल, हरी सब्जियां और मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार को शामिल करें। शाकाहारी भोजन से ह्दय, डायबिटीज सहित कई बीमारियाें के होने की संभावना न के बराबर रहती है।
केएल शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सक