
लाइफस्टाइल डेस्क। क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ कि नींद के दौरान आपका मुंह खुला रह गया हो या उसमें से लार निकलने लगी हो। अधिकांश लोगों का यह अनुभव है। अक्सर नींद में उनके मुंह से लार निकलने लगती है। इसका पता उनको या तो नींद में ही कुछ देर में चल जाता है क्योंकि लार से तकिया गीला हो जाता है या फिर सुबह उठने के बाद उन्हें इसका अहसास होता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। यह क्या मर्ज है। यह सेहत के लिए अच्छा है या बुरा और यदि यह लगातार हो रहा है तो इसका शरीर पर क्या असर पड़ेगा। मन में उठने वाले ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब यहां हम आपको बताने जा रहे हैं।
आप गहरी नींद से उठते हैं और पाते हैं कि आपका तकिया गीला है या आपका गाल लार से गीला है। नींद में लार टपकना असुविधाजनक और शर्मनाक हो सकता है, खासकर अगर आप किसी व्यक्ति के बगल में सो रहे हैं या किसी पब्लिक प्लेस पर सो रहे हैं। मुंह सूखने जैसी कुछ छोटी-मोटी मेडिकल दिक्कतों से भी आपके मुंह में ज़्यादा लार टपक सकती है और यह बहुत कम होता है, न्यूरोलॉजिकल बीमारी जैसी कुछ गंभीर बीमारियों का भी यही असर हो सकता है।
जब आपका मुंह सूखता है, तो लार ग्रंथियां उसे लुब्रिकेट करने के लिए एक्टिवेट हो जाती हैं। तो, अगर आपको पानी की कमी है या आप मुंह खोलकर सोते हैं, तो ये ग्रंथियां ज़्यादा लार बना सकती हैं, जिससे नींद में आपके मुंह में पानी आ सकता है।
इसका इलाज कैसे करें: दिन में अच्छी तरह हाइड्रेटेड रहें। फिर, अगर आप रात भर प्यासे जागते हैं तो बिस्तर के पास एक गिलास पानी रखें।
जब आप अपर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन या मौसमी एलर्जी से बीमार होते हैं, तो आपका शरीर ज़्यादा लार बनाता है। स्टेटन आइलैंड यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंस्टीट्यूट स्लीप मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. थॉमस माइकल किलकेनी कहते हैं कि इससे आपकी नाक, गले और मुंह से जर्म्स या जलन पैदा करने वाली चीजें बाहर निकल सकती हैं - लेकिन इससे नींद में आपके मुंह में पानी आने की संभावना भी बढ़ सकती है। एलर्जी से नाक भी बंद हो सकती है, जिससे आपको मुंह से सांस लेनी पड़ती है। इससे यह सूख सकती है और नींद में लार बनना शुरू हो सकता है।
इसका इलाज कैसे करें: मौसमी एलर्जी का इलाज क्लैरिटिन या ज़िरटेक जैसी ओवर-द-काउंटर एंटीहिस्टामाइन से करें। अगर आपको अपर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन है, तो आपको बीमारी को अपने आप ठीक होने देना होगा। लेकिन अगर यह एक या दो हफ़्ते से ज़्यादा रहता है, तो सलाह के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
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एसिड रिफ्लक्स वाले कुछ लोगों को इस बीमारी के लक्षण के तौर पर ज़्यादा लार आती है। इससे सोते समय लार टपक सकती है, क्योंकि ज़्यादा खाना खाने और बिस्तर पर लेटने से एसिड रिफ्लक्स और खराब हो सकता है।
इसका इलाज कैसे करें: एसिड रिफ्लक्स का इलाज घरेलू नुस्खों जैसे फाइबर का सेवन बढ़ाने और लाइफस्टाइल में बदलाव, जैसे कम खाना खाने से करें। जब आपका रिफ्लक्स बढ़ रहा हो, तो ओवर-द-काउंटर एंटासिड मदद कर सकते हैं, लेकिन अगर आपको उन्हें रेगुलर लेना है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

स्लीप एपनिया एक ऐसी कंडिशन है जो सोते समय लोगों की सांस लेने की क्षमता को कम कर देती है। पटेल कहते हैं कि इससे होने वाले अनियमित सांस लेने के पैटर्न की वजह से लोग मुंह से सांस ले सकते हैं और सोते समय लार टपकने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, स्लीप एपनिया वाले लोगों में स्लीप ब्रुक्सिज्म या दांत पीसने जैसी दूसरी बीमारियां होने की संभावना ज़्यादा होती है, जिससे लार टपकने की संभावना भी बढ़ सकती है क्योंकि दांत पीसने से लार ग्रंथियां उत्तेजित होती हैं।
इसका इलाज कैसे करें: अगर आपको लगता है कि आपको स्लीप एपनिया है, या थकान या खर्राटे जैसे दूसरे लक्षण महसूस होते हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। इलाज में लाइफस्टाइल में बदलाव शामिल हैं, जैसे वज़न कम करना, अगर आपका वज़न ज़्यादा है, और सांस लेने को कंट्रोल करने के लिए CPAP मशीन जैसे डिवाइस।
कुछ दवाएं आपके लार के प्रोडक्शन को बढ़ा देती हैं। इसे ड्रग-इंड्यूस्ड सियालोरिया या हाइपरसैलिवेशन के नाम से जाना जाता है, और इससे रात में आपके लार टपकने की संभावना बढ़ सकती है।
इसका इलाज कैसे करें: अगर आपको कोई नई दवा शुरू करने के बाद लार टपकने में तेज़ी दिखे, तो अपने डॉक्टर से बात करें। दवा के फ़ायदों और रात में लार टपकने की परेशानी के बारे में खुलकर बात करें।
कोई भी ऐसी बीमारी जो न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर असर डालती है, आपके लार बनने पर असर डाल सकती है, रात में मुंह बंद रखना मुश्किल बना सकती है, या निगलने की आपकी क्षमता पर असर डाल सकती है।
इस वजह से, पार्किंसंस बीमारी, सेरेब्रल पाल्सी और स्ट्रोक, ये सभी रात में लार टपकने का खतरा बढ़ा सकते हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी बीमारी है, तो आपको न्यूरोलॉजिकल बीमारी के दूसरे लक्षण भी दिखेंगे जैसे सिरदर्द, आपकी याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव, या कंपकंपी।
इसका इलाज कैसे करें: अपने डॉक्टर से उन दवाओं के बारे में बात करें जो आपके लार बनने को कम कर सकती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट और स्पीच, फिजिकल और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के साथ काम करने से भी मदद मिल सकती है, हालांकि जब आप सोते समय बेहोश होते हैं तो बिहेवियरल इंटरवेंशन का असर कम होता है।
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पेट या करवट लेकर सोने से ग्रेविटी के खिंचाव की वजह से सोते समय आपके मुंह से लार निकलने की संभावना ज़्यादा होती है।
इसका इलाज कैसे करें: पीठ के बल सोने की ट्रेनिंग लें, या मुंह बंद करके सोने पर खास ध्यान दें।