
लाइफस्टाइल डेस्क। किशोरावस्था (Puberty) में कदम रखते ही हर लड़की के जीवन में एक बड़ा बदलाव आता है-पहला पीरियड्स (First Period), जिसे मेडिकल भाषा में 'मेनार्के' (Menarche) कहा जाता है। अक्सर सही जानकारी न होने के कारण लड़कियां इस समय घबरा जाती हैं।
अगर आपको या आपके घर में किसी को पहली बार पीरियड्स आए हैं, तो डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आइए मेडिकल गाइडलाइंस के आधार पर जानते हैं कि इस स्थिति को कैसे संभालें।
अगर अचानक ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो शांत रहें और नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें-
घबराएं नहीं, तुरंत अपनी मां, बड़ी बहन, स्कूल टीचर या किसी सहेली से सैनिटरी पैड मांगें। अगर आप अकेले हैं, तो इमरजेंसी में साफ सूती कपड़े या टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल तब तक करें जब तक पैड न मिल जाए।
अगर कपड़ों पर दाग लग गया है, तो उसे ठंडे पानी और साबुन से धो लें। अपने पास हमेशा एक अतिरिक्त अंडरवियर और पैड का 'इमरजेंसी किट' रखें।
ज्यादातर लड़कियों को 10 से 15 साल की उम्र के बीच पहला पीरियड आता है। औसतन 12 साल की उम्र में यह शुरू होता है। अगर 16 साल तक पीरियड्स न आएं, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
पहली बार में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग नहीं होती। यह सिर्फ कुछ बूंदें या भूरे (Brown) रंग के दाग जैसा हो सकता है। यह पूरी तरह सामान्य है।
शुरू के 1-2 साल तक पीरियड्स हर महीने फिक्स तारीख पर नहीं आते। कभी यह 21 दिन में आ सकते हैं तो कभी 2-3 महीने तक नहीं आते, क्योंकि शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं।
पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से या कमर में हल्का दर्द और ऐंठन (Cramps) होना स्वाभाविक है। इसे कम करने के लिए-
आमतौर पर पहला पीरियड सामान्य होता है, लेकिन नीचे दी गई स्थितियों में डॉक्टर (Gynecologist) से मिलें-
एक जरूरी बात - पीरियड्स आना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर स्वस्थ है और सही तरीके से विकसित हो रहा है। इससे शर्माने या डरने की कोई बात नहीं है। खुलकर बात करें और अपनी स्वच्छता (Hygiene) का ख्याल रखें।