
हेल्थ डेस्क। कभी चाय की चुस्की लेते हुए, कभी दोस्तों के साथ बैठकर और कभी ऑफिस के तनाव के बीच अचानक सिगरेट पीने का मन क्यों करने लगता है? कई बार ऐसा भी होता है कि इंसान सिगरेट छोड़ने का फैसला कर चुका होता है, लेकिन किसी को धूम्रपान करते देखकर उसकी तलब फिर तेज हो जाती है।
आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ आदत है या इसके पीछे दिमाग की कोई खास प्रक्रिया काम करती है?
इसका जवाब निकोटीन, दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम और रोजमर्रा की उन आदतों में छिपा है, जिन्हें हम अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
सिगरेट की लत के पीछे सबसे अहम भूमिका निकोटीन की होती है। यह तंबाकू में पाया जाने वाला ऐसा रसायन है, जो दिमाग तक बहुत तेजी से पहुंचता है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के मुताबिक, सिगरेट से निकोटीन कुछ ही सेकंड में दिमाग तक पहुंच सकता है।
दिमाग में पहुंचने के बाद निकोटीन उन रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जो कई न्यूरोट्रांसमीटर के काम को प्रभावित करते हैं। इनमें डोपामिन भी शामिल है, जो दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम से जुड़ा केमिकल है। डोपामिन किसी अनुभव को दोबारा करने की प्रेरणा को मजबूत करने में भूमिका निभाता है।
जब कोई व्यक्ति सिगरेट पीता है, तो उसे कुछ समय के लिए अच्छा महसूस हो सकता है। दिमाग इस अनुभव को याद रखता है और धीरे-धीरे सिगरेट को उस एहसास से जोड़ने लगता है। नतीजा यह होता है कि बार-बार धूम्रपान करने पर निकोटीन की जरूरत और उसे पाने की इच्छा मजबूत हो सकती है।
मान लीजिए, कोई व्यक्ति हर दिन सुबह चाय के साथ सिगरेट पीता है। कुछ दिनों बाद चाय की खुशबू, वही जगह या सुबह का समय भी उसके दिमाग में सिगरेट की याद जगा सकता है। इसी तरह, दोस्तों के साथ बैठना, काम का ब्रेक लेना, तनाव महसूस करना या किसी दूसरे व्यक्ति को सिगरेट पीते देखना भी तलब बढ़ा सकता है।
इसे वैज्ञानिक भाषा में क्यू-इंड्यूस्ड क्रेविंग यानी किसी संकेत से पैदा होने वाली तलब कहा जाता है। दिमाग बार-बार दोहराए गए अनुभवों के बीच संबंध बना लेता है। इसलिए कई बार सिगरेट की इच्छा केवल शरीर में निकोटीन की कमी से नहीं, बल्कि किसी खास माहौल या आदत से भी उठ सकती है।
2020 में Nicotine & Tobacco Research जर्नल में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में धूम्रपान से जुड़े संकेतों और तलब पर 20 वर्षों के शोध का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि सिगरेट से जुड़े संकेतों को देखने या उनका सामना करने पर धूम्रपान करने वालों में तलब बढ़ सकती है।
यानी सिगरेट की तलब हमेशा पहले से तय नहीं होती। कभी कोई दृश्य, जगह, समय या भावनात्मक स्थिति भी अचानक इसकी वजह बन सकती है।
कई लोग मानते हैं कि सिगरेट पीने से तनाव कम होता है। लेकिन इस अनुभव को समझने के लिए निकोटीन की निर्भरता को भी देखना जरूरी है।
नियमित धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के शरीर और दिमाग को निकोटीन की आदत हो सकती है। जब कुछ समय तक निकोटीन नहीं मिलता, तो बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और सिगरेट की तीव्र इच्छा जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। ऐसे में सिगरेट पीने के बाद व्यक्ति को राहत महसूस हो सकती है, क्योंकि निकोटीन की कमी से पैदा हुई परेशानी कुछ समय के लिए कम हो जाती है।
इसका मतलब यह नहीं कि सिगरेट तनाव का अच्छा इलाज है। कई बार व्यक्ति जिस राहत को महसूस करता है, वह निकोटीन की कमी से पैदा हुए लक्षणों के अस्थायी रूप से कम होने से जुड़ी होती है।
सिगरेट छोड़ने के बाद निकोटीन से जुड़ी शारीरिक निर्भरता और पुरानी आदतों, दोनों से निपटना पड़ सकता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, निकोटीन छोड़ने पर शुरुआती दिनों में तलब, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद से जुड़ी परेशानी हो सकती है। ये लक्षण आम तौर पर समय के साथ कम होते हैं, हालांकि हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है।
इसके बावजूद, पुरानी आदतों से जुड़े संकेत लंबे समय बाद भी तलब जगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी पुराने दोस्त के साथ बैठना या उसी जगह लौटना जहां पहले नियमित रूप से सिगरेट पी जाती थी। इसलिए सिगरेट छोड़ने के बाद दोबारा तलब उठना यह साबित नहीं करता कि व्यक्ति कभी इसे छोड़ ही नहीं सकता। यह निकोटीन की निर्भरता और सीखी हुई आदतों का हिस्सा हो सकता है।
तलब महसूस होने पर तुरंत सिगरेट जलाने के बजाय कुछ देर रुकना, जगह बदलना, थोड़ी देर टहलना, पानी पीना या किसी दूसरे काम में ध्यान लगाना मददगार हो सकता है। अपने ट्रिगर्स यानी उन स्थितियों को पहचानना भी उपयोगी है, जिनमें बार-बार सिगरेट पीने का मन करता है।
अगर सिगरेट छोड़ने में मुश्किल हो रही है, तो डॉक्टर या तंबाकू छोड़ने की सेवा से मदद ली जा सकती है। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और कुछ दवाएं तलब तथा निकोटीन छोड़ने से होने वाली परेशानी कम करने में मदद कर सकती हैं। इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह लेना बेहतर है।