
लाइफस्टाइल डेस्क। दुनिया में जब हेल्दी लाइफस्टाइल और लंबी उम्र की बात होती है, तो जापान का नाम सबसे पहले लिया जाता है। जापानी लोग औसतन 84 से 85 साल तक जीते हैं और इस उम्र में भी वे खुद को एक्टिव, फिट और ऊर्जावान बनाए रखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी लंबी उम्र का राज सिर्फ जेनेटिक्स नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की डाइट, आदतों और सोच में छिपा हुआ है।
हैरानी की बात यह भी है कि जापान में लोग रोजाना चावल खाते हैं, फिर भी न मोटापे का शिकार होते हैं और न ही लाइफस्टाइल से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझते हैं। आखिर ऐसा कैसे संभव है? आइए जानते हैं जापानियों की सेहतमंद जिंदगी के पीछे छिपे असली राज।
चावल, लेकिन सही तरीके से
जापानी भोजन में चावल सबसे अहम हिस्सा होता है। वे दिन में तीनों समय चावल खाते हैं, लेकिन उसे बहुत सादे तरीके से पकाया जाता है। न ज्यादा तेल, न ज्यादा नमक। चावल के साथ हल्का सूप, उबली या भाप में पकी सब्जियां, मछली या थोड़ा सा अचार लिया जाता है। इस तरह पूरा भोजन बैलेंस्ड रहता है और कैलोरी जरूरत से ज्यादा नहीं बढ़ती।
छोटी प्लेट, ज्यादा पोषण
जापानियों की थाली देखने में भले छोटी लगे, लेकिन उसमें पोषण की भरमार होती है। उनकी डाइट में तरह-तरह के फूड शामिल होते हैं-
मिसो सूप, जो फर्मेंटेड सोयाबीन से बनता है और पाचन को मजबूत करता है।
सी वीड और हरी सब्जियां, जो शरीर को जरूरी मिनरल्स और फाइबर देती हैं।
मछली और सीफूड, जो दिल को स्वस्थ रखने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं।
टोफू और सोया प्रोडक्ट्स, जो हल्के होते हुए भी प्रोटीन की कमी पूरी करते हैं।
ग्रीन टी, जो शरीर को डिटॉक्स करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है।
80 प्रतिशत पेट भरने का नियम
जापानी संस्कृति में एक खास नियम है, जिसे ‘हारा हाची बू’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि पेट पूरी तरह भरने से पहले ही खाना बंद कर देना। इससे ओवरईटिंग नहीं होती, पाचन तंत्र पर दबाव कम रहता है और शरीर में फैट जमा नहीं होता।
मानसिक शांति और जीवन का उद्देश्य
जापानी लोग सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मन की सेहत पर भी ध्यान देते हैं। उनका दर्शन ‘इकिगाई’ यानी जीवन का उद्देश्य और सामुदायिक जुड़ाव उन्हें तनाव से दूर रखता है। यही मानसिक संतुलन उन्हें लंबी और खुशहाल जिंदगी जीने में मदद करता है।
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