
लाइफस्टाइल डेस्क। सर्दियों की सुबह अलार्म बजता है, लेकिन रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं करता। पांच मिनट और सोने के चक्कर में कब आधा घंटा निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। ठंड के मौसम में यह आदत ज्यादातर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह देर तक रजाई में पड़े रहने से आपकी नींद की आदतें भी बदल सकती हैं? दरअसल, सर्दियों में तापमान के साथ दिन की रोशनी भी कम हो जाती है। इसका असर शरीर की जैविक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक पर पड़ सकता है।
हमारे शरीर की एक आंतरिक जैविक घड़ी होती है, जो सोने और जागने का समय तय करने में मदद करती है। इस घड़ी को नियमित रखने में प्राकृतिक रोशनी की अहम भूमिका होती है। सुबह की रोशनी शरीर को जागने का संकेत देती है, जबकि शाम का अंधेरा नींद की तैयारी में मदद करता है।
सर्दियों में सुबह देर तक अंधेरा रहने और ठंड के कारण लोग देर से उठना पसंद करते हैं। अगर रोज उठने का समय बदलता रहे और सुबह की प्राकृतिक रोशनी भी कम मिले, तो सोने-जागने की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। CDC के अनुसार, सुबह उठने के आसपास तेज प्राकृतिक रोशनी शरीर की जैविक घड़ी को नियमित रखने और दिन में सतर्कता बढ़ाने में मदद करती है।
जरूरी नहीं। ज्यादा देर बिस्तर पर रहने और अच्छी नींद लेने में अंतर होता है। अगर कोई व्यक्ति रात में पर्याप्त नींद लेने के बावजूद सुबह लंबे समय तक रजाई में पड़ा रहता है, तो इससे नींद की गुणवत्ता अपने आप बेहतर नहीं होती।
वहीं, ठंड से बचने के लिए पर्याप्त गर्म बिस्तर होना जरूरी है। बहुत ठंडे कमरे में सोने से नींद बाधित हो सकती है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, सोने के वातावरण में तापमान, रोशनी और शोर नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
सर्दियों में रजाई में कुछ अतिरिक्त समय बिताना गलत नहीं है। परेशानी तब शुरू होती है, जब देर तक सोने और अनियमित दिनचर्या के कारण सुबह की रोशनी, शारीरिक गतिविधि और रात की नींद का संतुलन बिगड़ने लगता है। इसलिए ठंड का आनंद जरूर लें, लेकिन अपनी बॉडी क्लॉक को भी नियमित रखें।