
लाइफस्टाइल डेस्क। अल्जाइमर दुनिया भर में डिमेंशिया के सबसे आम कारणों में से एक है। अक्सर इसकी पहचान तब होती है, जब याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर इसका असर काफी बढ़ चुका होता है।
अब एडवांस डायग्नोस्टिक टेस्ट की मदद से अल्जाइमर से जुड़े दिमाग में होने वाले बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण आने से 10 से 15 साल पहले तक लगाया जा सकता है।
इससे बीमारी की जल्दी पहचान कर सही समय पर आगे की जांच और इलाज की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।
अब तक अल्जाइमर की पुष्टि के लिएसेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीएसएफ) टेस्टयाएमिलॉयड पीईटी स्कैन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। सीएसएफ टेस्ट के लिए स्पाइनल टैप जैसी दर्दनाक प्रक्रिया करनी पड़ती है।
वहीं, दोनों जांचें महंगी हैं और आसानी से हर जगह उपलब्ध भी नहीं हैं। इंदौर में अल्जाइमर के लिए एमिलॉयड पीईटी स्कैन की सुविधा भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में, परिवारों को जाँच के लिए दूसरे बड़े शहरों में जाना पड़ता है।
जल्दी बीमारी का पता चलने से मरीज और उनके परिवार सही मेडिकल फैसले ले सकते हैं, इलाज के लिए सही समय पर कदम उठा सकते हैं और भविष्य की बेहतर योजना बना सकते हैं।
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यह एडवांस ऑटोमेटेड टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े दो महत्वपूर्णबायोमार्कर्स, पीटाउ217(pTau217)और एबीटा42(Aβ42)की जाँच करता है। ये दोनों अल्जाइमर से जुड़े बदलावों की पहचान में अहम भूमिका निभाते हैं।