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World Alzheimer's Day: अब लक्षण दिखने से 15 साल पहले ही अल्जाइमर की पहचान संभव

अब एडवांस डायग्नोस्टिक टेस्ट की मदद से अल्जाइमर से जुड़े दिमाग में होने वाले बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण आने से 10 से 15 साल पहले ...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 11:14:31 AM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 11:27:00 AM (IST)
World Alzheimer's Day: अब लक्षण दिखने से 15 साल पहले ही अल्जाइमर की पहचान संभव
आज विश्‍व अल्जाइमर दिवस है।

HighLights

  1. याददाश्त की परेशानी या कॉग्निटिव डिक्लाइन महसूस हो रहा हो।
  2. जिनके परिवार में अल्जाइमर या डिमेंशिया का इतिहास रहा हो।
  3. मरीज जिन्हें न्यूरोलॉजिस्ट ने कॉग्निटिव असेसमेंट की सलाह दी हो।

लाइफस्‍टाइल डेस्‍क। अल्जाइमर दुनिया भर में डिमेंशिया के सबसे आम कारणों में से एक है। अक्सर इसकी पहचान तब होती है, जब याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर इसका असर काफी बढ़ चुका होता है।

अब एडवांस डायग्नोस्टिक टेस्ट की मदद से अल्जाइमर से जुड़े दिमाग में होने वाले बदलावों का पता याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण आने से 10 से 15 साल पहले तक लगाया जा सकता है।

इससे बीमारी की जल्दी पहचान कर सही समय पर आगे की जांच और इलाज की दिशा में कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

अब तक अल्जाइमर की पुष्टि के लिएसेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीएसएफ) टेस्टयाएमिलॉयड पीईटी स्कैन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। सीएसएफ टेस्ट के लिए स्पाइनल टैप जैसी दर्दनाक प्रक्रिया करनी पड़ती है।

वहीं, दोनों जांचें महंगी हैं और आसानी से हर जगह उपलब्ध भी नहीं हैं। इंदौर में अल्जाइमर के लिए एमिलॉयड पीईटी स्कैन की सुविधा भी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में, परिवारों को जाँच के लिए दूसरे बड़े शहरों में जाना पड़ता है।

जल्दी बीमारी का पता चलने से मरीज और उनके परिवार सही मेडिकल फैसले ले सकते हैं, इलाज के लिए सही समय पर कदम उठा सकते हैं और भविष्य की बेहतर योजना बना सकते हैं।

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यह एडवांस ऑटोमेटेड टेस्ट अल्जाइमर से जुड़े दो महत्वपूर्णबायोमार्कर्स, पीटाउ217(pTau217)और एबीटा42(Aβ42)की जाँच करता है। ये दोनों अल्जाइमर से जुड़े बदलावों की पहचान में अहम भूमिका निभाते हैं।

अल्जाइमर ब्लड बायोमार्कर टेस्ट किन लोगों के लिए उपयोगी

  • 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग।
  • ऐसे लोग जिन्हें शुरुआती दौर में याददाश्त से जुड़ी परेशानी या कॉग्निटिव डिक्लाइन महसूस हो रहा हो।
  • जिनके परिवार में अल्जाइमर या डिमेंशिया का इतिहास रहा हो।
  • वे मरीज जिन्हें न्यूरोलॉजिस्ट या फिजिशियन ने कॉग्निटिव असेसमेंट की सलाह दी हो।
  • इस टेस्ट के लिए सिर्फ के2 ईडीटीएप्लाज्मा सैंपल की जरूरत होती है और इसके अत्यधिक विश्वसनीय रिजल्ट 24 घंटे के भीतर मिल जाते हैं।
  • डायग्नोस्टिक्स के क्षेत्र में 34 से ज्यादा वर्षों की उत्कृष्टता के साथ संपूर्ण हेल्थकेयर सेंट्रल इंडिया में नेक्स्ट-जेनरेशन डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने के अपने प्रयास को लगातार आगे बढ़ा रहा है।
  • इससे मरीजों की बेहतर देखभाल और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर के बेहतर नतीजों में मदद मिल रही है।