
लाइफस्टाइल डेस्क। विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के मौके पर जब आज पूरी दुनिया सिंगल-यूज प्लास्टिक के बढ़ते कचरे और प्रदूषण से निपटने के तरीके खोज रही है, तब भारत का एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत राज्य पूरे देश के लिए रोल मॉडल बनकर उभरा है।
तीन देशों, नेपाल, भूटान और चीन, की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरे पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम ने इस खतरे को दशकों पहले ही भांप लिया था। जब देश भर में प्लास्टिक बैन को लेकर कोई सख्त नियम नहीं थे, तब सिक्किम ने 28 साल पहले ही इसके खिलाफ एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाया था।

कल्पना कीजिए 90 के दशक के उस दौर की, जब बाजार में प्लास्टिक की थैलियों का चलन चरम पर था और इसका कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प नहीं माना जाता था। उसी वक्त यानी साल 1998 में सिक्किम ने देश में सबसे पहले डिस्पोजेबल प्लास्टिक की थैलियों के इस्तेमाल और बिक्री पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी लगा दी थी।
ऐसा करने वाला वह भारत का पहला राज्य बना था, जिसने पर्यावरण की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा।

सिक्किम का यह पर्यावरण अभियान केवल थैलियों के बैन पर ही नहीं रुका। कचरे के बढ़ते पहाड़ों और जहरीले प्रदूषण से हिमालयी क्षेत्र को बचाने के लिए राज्य सरकार ने साल 2016 में दो और बेहद कड़े फैसले लिए:
बोतलबंद पानी पर पाबंदी - राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, बैठकों और सरकारी आयोजनों में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (प्लास्टिक बोतलों) के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया।
थर्मोकोल के बर्तनों की छुट्टी - पूरे राज्य में थर्मोकोल या स्टायरोफोम से बनी डिस्पोजेबल प्लेट्स, कप और कटलरी के व्यावसायिक और निजी इस्तेमाल को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया।
किसी भी पुरानी आदत को बदलना आसान नहीं होता, लेकिन सिक्किम प्रशासन ने इसे जन-भागीदारी और सख्त नियमों के संतुलन से मुमकिन कर दिखाया। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई के साथ-साथ जनता को प्राकृतिक विकल्प भी उपलब्ध कराए गए।
बाजार में प्लास्टिक की जगह बांस, पत्तों, गन्ने की खोई (बगास) और आसानी से नष्ट होने वाले (बायोडिग्रेडेबल) उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इसका सकारात्मक असर यह हुआ कि आम जनता और व्यापारियों ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले और इको-फ्रेंडली विकल्पों को खुशी-खुशी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया।
सिक्किम का प्रकृति-प्रेम सिर्फ कचरा प्रबंधन तक ही सीमित नहीं रहा। पर्यावरण संरक्षण के इसी सफर को आगे बढ़ाते हुए साल 2016 में सिक्किम ने एक और वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया। रासायनिक खादों और कीटनाशकों से पूरी तरह दूरी बनाते हुए, यह राज्य भारत का पहला 'सौ फीसदी पूर्ण जैविक खेती' (100% Organic State) करने वाला राज्य बन गया।
सिक्किम के इन्हीं दूरदर्शी फैसलों से सीख लेकर आज देश के कई अन्य राज्यों ने भी सिंगल-यूज प्लास्टिक पर नकेल कसी है। पर्यावरण दिवस के इस मौके पर सिक्किम की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो प्रकृति को बचाने के लिए उठाए गए कदम भविष्य की दिशा बदल सकते हैं।