
नईदुनिया प्रतिनिधि इंदौर। महिलाओं के जीवन में गर्भावस्था, प्रसव और रजोनिवृत्ति जैसे चरणों के दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं से राहत दिलाने के साथ शरीर की मजबूती, गतिशीलता और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार गर्भावस्था के दौरान बढ़ते वजन और शरीर की मुद्रा में बदलाव के कारण महिलाओं को कमर दर्द, पेल्विक क्षेत्र में दर्द और मांसपेशियों में थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में सुरक्षित व्यायाम, सही मुद्रा और श्वास संबंधी अभ्यास इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट- राखी नागर के अनुसार प्रसव के बाद भी कई महिलाएं कमर दर्द, पेट की मांसपेशियों की कमजोरी, पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और पेशाब के अनियंत्रित रिसाव जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। उचित जांच और प्रसवोत्तर पुनर्वास के माध्यम से शरीर की ताकत बढ़ाने और महिलाओं को दैनिक गतिविधियों में बेहतर ढंग से लौटने में सहायता मिल सकती है।
रजोनिवृत्ति के दौरान मांसपेशियों की मजबूती और हड्डियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इस दौरान शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम, संतुलन संबंधी अभ्यास और वजन सहने वाले व्यायाम महिलाओं को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
राखी ने कहा कि महिलाओं को दर्द और कमजोरी को सामान्य मानकर सहने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। फिजियोथेरेपी केवल दर्द के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर शारीरिक गतिविधि, मजबूती और जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।