
लाइफस्टाइल डेस्क। वर्ल्ड स्पाइन डे (World Spine Day) के अवसर पर भोपाल के हेल्थ एक्सपर्ट्स ने एक चेतावनी जाकी की है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बदलती कार्यशैली, घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत और गलत पोस्चर रीढ़ की हड्डी (Spine) की सेहत पर असर पड़ रहा है। भोपाल में स्थिति चिंताजनक है, जहां हर तीसरा व्यक्ति कमर दर्द और रीढ़ संबंधी समस्याओं से ग्रसित है।
भोपाल के प्रमुख हॉस्पिटल्स- AIIMS (एम्स भोपाल) में रोज लगभग 200 मरीज तथा हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 150 से अधिक मरीज कमर दर्द और स्पाइन की समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
स्पेशलिस्ट के अनुसार, रीढ़ की हड्डी की समस्याएं अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही हैं।
IT कंपनियों, बैंक, कॉर्पोरेट और सरकारी कार्यालयों में 8 से 10 घंटे तक लगातार बैठकर काम करने वाले कर्मचारी और प्रतिदिन लंबे समय तक दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर) चलाने वाले लोग इससे परेशान है। 2020 में दुनिया भर में 61.9 करोड़ लोग कमर दर्द से पीड़ित थे। अनुमान है कि साल 2050 तक यह संख्या बढ़कर 84 करोड़ से अधिक हो जाएगी।
डा. सौरभ बीडकर (ब्रेन एंड स्पाइन सर्जन)- लंबे समय तक झुककर बैठने और रीढ़ को सही सहारा (Back Support) न देने से रीढ़ की हड्डियों के बीच की डिस्क और मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है। रीढ़ की मांसपेशियों को सक्रिय न रखने से कम उम्र में ही डिस्क स्लिप या स्पोंडिलाइटिस की समस्या हो रही है।
डा. सुनील पांडेय (स्पाइन केयर एक्सपर्ट और फिजियोथेरेपिस्ट)- अक्सर लोग कमर दर्द होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर (दर्द निवारक गोलियां) खाकर काम चलाते रहते हैं। दर्द को गोलियों से दबाने से बीमारी अंदर ही अंदर गंभीर रूप ले लेती है और सही समय पर इलाज में देरी हो जाती है।
हमीदिया अस्पताल के पेन मैनेजमेंट क्लीनिक में बिना बड़ी सर्जरी के रीढ़ के दर्द से राहत दिलाने वाली अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है-