Alirajpur News: राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले- विकसित भारत हो हमारा लक्ष्य और संकल्प
Alirajpur News: राज्यपाल ने नेत्र संकलन केंद्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि जीते जी रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान सभी को जरूर करना चाहिए।
By Hemant Kumar Upadhyay
Edited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Fri, 22 Dec 2023 01:32:10 PM (IST)
Updated Date: Fri, 22 Dec 2023 01:32:10 PM (IST)
होनहार दक्ष को मेडल पहनाते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल।HighLights
- राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गायत्री शक्तिपीठ विद्यालय में सम्मेलन को संबोधित किया
- राज्यपाल ने कहा कि हमारा लक्ष्य और संकल्प विकसित भारत ही होना चाहिए।
- अपने संबोधन में राज्यपाल ने सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारी को लेकर विस्तार से बताया
Alirajpur News: नईदुनिया प्रतिनिधि, आलीराजपुर। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा ने उस समय देश में जिस आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन की अपेक्षा की थी, वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब पूरे देश में क्रांति का रूप ले चुकी है। हमारा लक्ष्य और संकल्प विकसित भारत ही होना चाहिए। जब देश के नागरिक अपनी भूमिका में रहकर देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है। हम सभी को देश के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए।
राज्यपाल गुरुवार को गायत्री शक्तिपीठ हायर सेकंडरी स्कूल जोबट के 40वें स्नेह सम्मेलन में अपना उद्बोधन दे रहे थे। उन्होंने शक्तिपीठ द्वारा संचालित नेत्र संकलन केंद्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि जीते जी रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान सभी को जरूर करना चाहिए।
इस मौके पर उन्होंने सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारी को लेकर विस्तार से बताया और कहा कि सिकलसेल एक अनुवांशिक बीमारी है, जो बच्चों में उनके माता-पिता से आती है। आलीराजपुर जिले में जागरूकता के अभाव में यह बीमारी तेजी से फैल रही है। प्रदेश सरकार ने सिकलसेल की रोकथाम की शुरुआत इसीलिए पहले झाबुआ और आलीराजपुर जिले से की है।
पटेल ने कहा कि शादी से पहले कुंडली का मिलान तो आम बात है। प्रदेश के आदिवासियों को शादी से पहले जेनेटिक काउंसिल कार्ड का मिलान जरूर करना चाहिए। सिकलसेल रोग को वर्ष 2047 तक समाप्त करने के लिए जरूरी है कि जनजातीय समुदाय के युवा शादी के पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड का मिलान करें। सिकलसेल रोगी युवक-युवती किसी भी अवस्था में आपस में विवाह नहीं करें। गर्भवती माताओं की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप से कराएं। प्रसव के 72 घंटों के भीतर नवजात शिशु की जांच भी कराई जानी चाहिए।