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मतांतरण करना पड़ेगा महंगा, नहीं मिलेगा इन योजनाओं का फायदा, MP की ग्रामसभा में पास हुआ प्रस्ताव

आलीराजपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र सोंडवा में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई चेतना उभरती दिखाई दे रही है। ग्राम पंचायत आकड़िया के अंतर्गत आ...और पढ़ें

By Manoj BhadoriyaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 10 Oct 2025 06:11:40 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Oct 2025 06:11:39 PM (IST)
मतांतरण करना पड़ेगा महंगा, नहीं मिलेगा इन योजनाओं का फायदा, MP की ग्रामसभा में पास हुआ प्रस्ताव
MP News:मतांतरण करना पड़ेगा महंगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, छकतला (आलीराजपुर)। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र सोंडवा में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई चेतना उभरती दिखाई दे रही है। ग्राम पंचायत आकड़िया के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिलकदा में गुरुवार को अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को विशेष अधिकार देने वाले पेसा अधिनियम के तहत विशेष ग्रामसभा आयोजित की गई, जिसमें ऐतिहासिक और निर्णायक प्रस्ताव पारित किया गया।

इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो आदिवासी परिवार अपनी मूल संस्कृति और परंपरा को छोड़कर ईसाई धर्म अपना चुके हैं, वे अब गांव की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें शासन की योजनाओं से मिलने वाले लाभों से भी वंचित रखा जाएगा।


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ग्रामसभा के दौरान उपस्थित ग्रामीणजन।

इन योजनाओं और सुविधाओं का नहीं मिलेगा लाभ

  • सर्वसम्मति से जो प्रस्ताव पारित हुआ, उनमें कहा गया है कि ईसाई धर्म अपना चुके परिवारों के अंत्येष्टि संस्कार भी भील समाज के श्मशान घाट पर नहीं किए जाएंगे।
  • विवाह में गांव से किसी प्रकार की सहायता या सहयोग नहीं मिलेगा। उनके साथ भील समाज के परिवार वैवाहिक संबंध नहीं जोड़ेंगे।
  • आदिवासी जाति के आधार पर मिलने वाली शासन की योजनाओं से वंचित रखा जाएगा।
  • ग्रामसभा क्षेत्र में बाहरी ईसाई पादरियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
  • यदि कोई मतांतरित परिवार घर वापसी करता है, तो ग्रामसभा उसका ससम्मान स्वागत करेगी।
  • जो परिवार प्रस्ताव को नहीं मानेगा, उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

आदिवासी संस्कृति को बचाने की पहल

पेसा जिला समन्वयक प्रवीण चौहान ने बताया कि इस अधिनियम का उद्देश्य आदिवासियों को स्थानीय स्वशासन, पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण का अधिकार देना है। ग्रामसभा प्रस्ताव अपने हक में पारित कर सकती है। जबकि जिला पंचायत सीईओ प्रखर सिंह ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र है। ग्राम पंचायत अपने स्तर पर निर्णय ले सकती है, यह उसका अधिकार है लेकिन प्रशासन किसी को शासन की योजनाओं से सिर्फ धर्म के आधार पर वंचित नहीं रख सकता। शिकायत मिलने पर उचित कार्यवाही की जाएगी।