आलीराजपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जैन समाज के पर्वाधिराज पयुर्षण महापर्व का समापन शुक्रवार को संवत्सरी के बड़े प्रतिक्रमण के साथ हुआ। सुबह प्रतिक्रमण, भक्तामर पाठ व केसर पूजा के साथ धार्मिक क्रियाओं की शुरुआत हुई। सुबह साढ़े नौ बजे के करीब राजेंद्र उपाश्रय में प्रवचन प्रारंभ हुए। इस दौरान अष्टप्रकारी पूजा की बोलियां लगाई गईं, जिसमें समाजजनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। समाजजनों ने एक-दूसरे को मिच्छामी दुक्कड़म कहकर ज्ञात-अज्ञात गलतियों के लिए क्षमा मांगी।
पर्व के अंतिम दिवस सचिन अशोक कुमार व सचिन प्रभावचंद्र जैन ने साधुओं की सत्ताइश समाचारी व क्षमायाचना पर्व के संबंध में बताते हुए कहा कि प्राणी मात्र से हुई गलतियों के लिए वर्ष भर में संवत्सरी के दिन प्रतिक्रमण कर क्षमायाचना करनी चाहिए। वहीं साधुओं की सत्ताइश समाचारी (नियम) के बारे उल्लेख करते हुए उनके रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार, व्यवहार आदि के बारे में बताया।
प्रवचन के दौरान ही वर्षभर में होने अष्टप्रकारी धार्मिक क्रियाओं, जल पूजा, फल पूजा, नैवेद्य पूजा, अक्षत पूजा, केसर पूजा सहित अन्य क्रियाओं की बोलियां लगाई गईं। इनके अतिरिक्त भगवान की महाआरती सहित अन्य प्रकार की धार्मिक क्रियाओं की बोलियां भी लगीं। कल्पसूत्र वाचन की समाप्ति पर नगर में कल्पसूत्र ग्रंथ को भ्रमण करवाया गया। जिसका लाभ तेजराज हरकचंद्र जैन परिवार ने लिया।
संवत्सरी प्रतिक्रमण हुआ
राजेंद्र उपाश्रय व हेमेंद्रसूरि भवन में श्रीसंघ का सामूहिक प्रतिकमण हुआ। इस दौरान श्रीसंघ से सर्वप्रथम क्षमायाचना करने की बोली भी लगाई गई। इस बोली में समाजजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिक्रमण समापन के पश्चात उपस्थित समाजजनों ने एक-दूसरे से गत वर्ष में मन, वचन व काया से हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की।
आज होंगे तपस्वियों के पारणे
महापर्व की समाप्ति पर शनिवार को पारणा पांचम पर सभी तपस्वियों के पारणे हेमेंद्रसूरि भवन में कराए जाएंगे। रात में गुरुदेव राजेंद्र सूरिश्वर मसा की महाआरती की जाएगी, जिसका लाभ प्रमोदकुमार अमृतलाल जैन परिवार ने लिया है।