योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया बालाघाट। माओवादी हिंसा के काले दौर से निकलकर पहले चरण में बालाघाट के 100 बैगा गांव अब विकास की नई कहानी लिखने की तैयारी में हैं। दशकों तक माओवादी दंश और भौगोलिक दुर्गमता के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इन गांवों के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन ने करीब 400 करोड़ रुपये का विकास खाका तैयार किया है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अगुवाई में इस बड़ी कार्ययोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। योजना की खासियत यह है कि गांवों की जरूरतों को एक साथ कई मोर्चों पर पूरा किया जाएगा।
12 विभाग विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर रहे
स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, महिला एवं बाल विकास समेत 12 विभाग अपने अपने स्तर पर विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। कुपोषण, मलेरिया और खसरा जैसी बीमारियों से जूझ रहे बैगा ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को भी प्राथमिकता मिलेगी।
सबसे बड़ा हिस्सा पंचायत विकास विभाग के पास होगा, जहां करीब 300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सड़क, नाली, पुल और पुलिया बनने से दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।
इन विभागों में होगा विकास कार्य
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचइ), ऊर्जा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, आयुष विभाग, कौशल विकास व प्रौद्योगिकी, मत्स्य विभाग, पशु चिकित्सा एवं सेवाएं, जनजातीय कार्य विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग।
1.90 करोड़ से 22 स्वास्थ्य भवनों की होगी मरम्मत
जानकारी के अनुसार, हाल ही में बैगा क्षेत्रों में सामने आई स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को देखते हुए शासन-प्रशासन का फोकस स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। शासन स्तर से बैगा क्षेत्रों के 22 स्वास्थ्य केंद्रों के भवनों की मरम्मत के लिए 1.90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृति हो गई है।
इसके अलावा चिकित्सकों की कमी पूरा करने के लिए शासन ने जिले में जल्द ही 51 अनुबंधित चिकित्सकों की सेवाएं ली जाएंगी। ये प्रयोग दूरस्थ क्षेत्रों में सुविधाओं को सुदृढ़ करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
216 काम मनरेगा से, 97 कार्य बड़ी लागत के
शासन-प्रशासन बालाघाट के माओवाद प्रभावित रहे किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में विकास कार्य का मसौदा तैयार कर रहा है। इसमें गांवाें और पंचायतों के विकास पर अधिक फोकस है। यही वजह है कि बड़ी राशि (लगभग 300 करोड़) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में खर्च होगी।
इसमें 216 कार्य मनरेगा योजना के तहत कराने की तैयारी है। वहीं, 97 कार्य बड़ी लागत के होंगे। मनरेगा के अलावा विकास कार्याें के लिए विभागीय बजट, सीएसआर और डीएमएफ से भी राशि वहन की जाएगी।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन स्तर पर माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे गांवों में विकास का खाका तैयार किया जा रहा है। इन कार्याें की स्वीकृत कराने की प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन हर स्तर पर ग्रामों का विकास और ग्रामीणों को बेहतर जीवन देने के लिए संकल्पित है।
कुमार सत्यम, कलेक्टर, बालाघाट