पांच राज्य, 64 दिन और 22 हजार किमी की यात्रा, बालाघाट पुलिस ने पहेली बन चुके लूटकांड का किया खुलासा
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और बिहार में 64 दिनों तक 22,270 हजार से अधिक किमी का सफर कर जांच-पड़ताल और अहम डेटा जुटाने के बाद बालाघाट पु...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 07:22:20 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 07:23:53 PM (IST)
HighLights
- छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और बिहार में की जांच
- लूट को अंतरराज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ ने अंजाम दिया था
- 190 संदिग्धों से पूछताछ, 6.24 लाख टेलीफोन रिकार्ड खंगाले
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। 28 जून की रात लांजी के सराफा कारोबारी कपिल आसटकर और एक महीने बाद ही पांच अगस्त की रात रजेगांव के गेंदलाल करंडे से मारपीट कर लूट की घटना का बालाघाट पुलिस ने 64 दिनों के इंतजार के बाद खुलासा कर दिया है। लूटपाट करने वाले गैंग के तीन आरोपित पुलिस गिरफ्त में हैं।
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और बिहार में 64 दिनों तक जांच
पांच राज्यों (छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और बिहार) में 64 दिनों तक 22,270 हजार से अधिक किमी का सफर कर सूक्ष्म जांच-पड़ताल और अहम डेटा जुटाने के बाद बालाघाट पुलिस ने पहेली बन चुके लूटकांड का खुलासा किया है।
लूट को अंतरराज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ ने अंजाम दिया था
एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि लूट को अंतरराज्यीय ‘ऐरागोल्ला गैंग’ ने अंजाम दिया था। 14 टीम में शामिल 76 पुलिसकर्मियों व अधिकारियों की पांच राज्यों के 21 जिलों में सतत जांच, तकनीकी मदद, अन्य राज्यों के सहयोग और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) से मिली मदद से पुलिस ने इस लूटकांड का पर्दाफाश किया है।
दोनों घटनाएं एक पैटर्न पर, मास्टरमाइंड की पिछले माह मौत हो गई
एसपी ने बताया कि दोनों घटनाएं एक-समान पैटर्न पर हुई थीं। इसके मास्टरमाइंड की पिछले महीने 15 सितंबर को रायपुर में हुए सड़क हादसे में मौत हो गई है। इस पूरे कांड को कुल छह आरोपितों ने अंजाम दिया था, जिसमें तीन पुलिस की गिरफ्त में हैं, तो दो फरार हैं, जो जल्द पकड़ में आएंगे। लूट की दोनों घटनाओं में 30 लाख रुपये के जेवर लूटे गए थे, जिसमें पुलिस ने 22 लाख के जेवर जब्त कर लिए हैं।
दोनों लूट में ये थीं समानता
- आरोपितों ने दोनों घटनाओं में स्पोर्ट्स बाइक का इस्तेमाल किया था।
- आरोपित थोड़ी देर में अपनी लोकेशन बदलते, कभी बाइक चलाने वाला पीछे, तो पीछे बैठा शख्स बाइक चलाता था।
- दोनों लूट से पहले आरोपितों ने लांजी व रजेगांव आकर रैकी की थी।
लूट के मास्टरमाइंड का ‘बालाघाट कनेक्शन’
दोनों लूट की घटना का मास्टरमाइंड चिरंजीवी उर्फ शुभम यादव बालाघाट के इंदिरा नगर में रहता था। 2024 में वह बालाघाट से भाग गया था। 15 सितंबर को उसकी सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा, तब हुआ जब वह रायपुर में लूट की घटना कारित करने अपने साथी के साथ जा रहा था।
साथी घायल हो गया और चिरंजीवी की मौत हो गई। एसपी मिश्रा ने बताया कि चिरंजीवी लूट के ही एक प्रकरण में छग के महासमुंद जेल में बंद था। तभी उसकी पहचान नरसिम्हा और सचिन से हुई।
190 संदिग्धों से पूछताछ, 6.24 लाख टेलीफोन रिकार्ड खंगाले
दरअसल, सभी आरोपित लूट/चोरी की घटना कारित करने वाले ऐरागोल्ला गैंग से ताल्लुक रखते हैं। 190 संदिग्धों से पूछताछ, 6.24 लाख टेलीफोन रिकार्ड खंगाले लूट की घटना को अंजाम देने वाले शातिर आरोपितों तक पहुंचने के लिए बालाघाट पुलिस ने 64 दिनों में 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले, 190 संदिग्धों सहित पांच राज्यों की छह जेलों में बंद आरोपितों से सघन पूछताछ की।
महाराष्ट्र पुलिस के ‘मार्वल’ प्रोग्राम का सहयोग मिला
एसपी मिश्रा के अनुसार, लूट कारित करने के बाद आरोपितों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए पुलिस ने टीम वर्क दिखाया। एसआई टूल की मदद ली गई। महाराष्ट्र पुलिस के ‘मार्वल’ प्रोग्राम का सहयोग मिला। बताया गया कि आरोपित लूट के बाद रजेगांव, गोंदिया होते हुए ओडिशा बार्डर फिर तिरुपति गए थे। पुलिस ने छह लाख 24 हजार 588 टेलीफोन रिकार्ड की जांच की गई।
ऐसे देते थे लूट को अंजाम
- हेलमेट पहनकर स्पोर्ट्स बाइक का उपयोग।
- रास्ते में बाइक की अदला-बदली करते थे।
- सीमित इंटरनेट कॉलिंग और हैंडसेट का उपयोग सिर्फ वारदात के समय करते थे।
- कैमरों से बचने पहचान छिपाई गई।
- लूट के बाद बाइक बदली और कपड़े भी।
इन्होंने दिया था लूट को अंजाम
- रोशन पिता कलिंगा ध्रुव, महासमुंद (छग)
- नरसिम्हा उर्फ पुतरो पिता सुदर्शन प्रधान, जाजपुर (ओडिशा)
- सचिन पुत्र राजेश ध्रुव, महासमुंद (छग)
- आकाश पिता शंकर प्रधान, जाजपुर (ओडिशा) फरार है।
- प्रकाश प्रधान पिता पुरुषोत्तम प्रधान, जाजपुर (ओडिशा) फरार है।
- चिरंजीवी उर्फ शुभम पिता संजय यादव, महासमुंद (बालाघाट का पूर्व निवासी)- मृत्यु हो चुकी है।