
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। बिरसा विकासखंड की अडोरी और मछुरदा पंचायत के बैगा बाहुल गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। इसके पीछे विभागीय उदासीनता के अलावा इन गांवों की भौगोलिक परिस्थिति भी बड़ी वजह है। इन गांवों में नल-जल योजना अधर में है। कई जगह पाइपलाइन का बिछाव हुआ है, तो अधिकांश इलाकों में पाइपलाइन आज तक नहीं बिछ सकी है। पेयजल योजना पर ग्रामीणों की निर्भरता बेहद कम है। लगभग 10-12 गांवों में छह-सात हैंडपंप हैं। कुछ से पानी आता है, तो कई बंद पड़े हैं।
अडोरी पंचायत के सरपंच परशराम धुर्वे ने बताया कि हैंडपंप खराब होने पर स्थिति और खराब हो जाती है। हैंडपंप सुधारने के लिए कई बार विभाग को आवेदन दिया जाता है। नौबत सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की आ जाती है। इसके बाद भी हैंडपंप में सुधार नहीं होता।
मजबूरीवश, बैगा-आदिवासी ग्रामीण झिरिया या नदी-तालाब का पानी पीते हैं। ढाई महीने में 21 बच्चों की मौत से मचे हाहाकार के बीच पीएचई विभाग की नींद खुली है। विभाग गांव-गांव जाकर हैंडपंप की सफाई, क्लोरिनेशन की प्रक्रिया कर रहा है।
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प्रभावित क्षेत्रों में फैली महामारी के बीच बालाघाट आई आईसीएमआर ने पानी के नमूने लिए थे। जांच में विशेषज्ञों को पानी में एडिनोवायरस मिला है। हालांकि, इसकी विभाग ने पुष्टि नहीं की है। यह वायरस पेट और आंत को संक्रमित करता है। दूषित पानी से फैलता है। प्रभावित क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत 4 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन कई गांवों में न टंकी बनी है और न ही पाइपलाइन का व्यवस्थित बिछाव हुआ है।