
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और अधिक से अधिक बच्चों को आधारभूत शिक्षा मुहैया कराने के लिए कलेक्टर मृणाल मीना ने तकनीकी मदद से नवाचार किया है।
‘राइज बाल गिनती’ नामक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) एप लांच कर कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की दैनिक उपस्थिति बढ़ाने की पहल की है। यह नवाचार करने वाला बालाघाट मध्य प्रदेश का पहला जिला है।
इसका आइडिया कलेक्टर को उज्जैन के महाकाल मंदिर में आने वाले भक्तों की फेस व हेड काउंटिंग के आइडिया से आया। उज्जैन में जिला पंचायत सीईओ रहते हुए मीना ने महाकाल मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या पता करने में इसी तकनीक की मदद ली थी।
कलेक्टर ने बताया कि बालाघाट व लालबर्रा ब्लाक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एप को इंदौर की राइजिंग डाइन प्रा.लि. कंपनी की 25 युवाओं की टीम ने री-डेवलप किया है, जो मप्र के अलग-अलग जिलों के हैं। टीम को लीड करने वाले और कंपनी के फाउंडर मेंबर बालाघाट निवासी श्रेयांश जैन (25) हैं। उन्होंने बताया कि एप को हमने री-डेवलप कर बालाघाट के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तैयार किया है। उनकी टीम मध्य प्रदेश सरकार के लिए भी इसी तरह का एआई एप तैयार कर रही है।
एप में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि पता चला सके कि वह कुपोषित हैं या नहीं। अगर दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोबाइल से फोटो लेकर नेटवर्क में आते ही सर्वर में अपलोड कर सकेंगी। एप में सारे बच्चों की जानकारी जैसे उम्र, वजन, पता की जानकारी फीड की जाएगी। एप पर बच्चों की संख्या, केंद्र की जीपीएस लोकेशन, फोटो लेने की तिथि व समय स्वतः दर्ज होगा।
केंद्रों में गलत और फर्जी एंट्री पर रोक लगेगी। पोषण आहार वितरण में भी अनियमितताएं रुकेंगी। जितने बच्चे आए, उतने पोषण आहार की खपत होगी। डाटा की जिला स्तर पर निगरानी की जाएगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, उन्हें पोषण आहार वितरण और केंद्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ये पहल की गई है। अभी दो ब्लाक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एप की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। - मृणाल मीना, कलेक्टर, बालाघाट।