बालाघाट। बालाघाट जिले के जंगलों में नक्सलियों की पकड़ कमजोर करने के लिए पुलिस गांवों को गोद लेकर जनता के बीच समन्वय स्थापित करने कवायद कर रही है। इसके लिए पुलिस जहां जनता से संवाद बढ़ा रही है। वहीं दूसरी तरफ डेवलपमेंट प्लान को लेकर भी काम कर रही है।

वहीं इस प्लान को ब्रेक करने के लिए नक्सली बालाघाट के जंगल में अपनी तादात बढ़ा रहे हैं। दलम का विस्तार करने के साथ ही नए संगठन भी तैयार कर रहे हैं। सेंट्रल कमेटी पिछले 5 साल से बालाघाट को फोकस कर काम कर रही है। यहां अपनी खोई ताकत वापस पाने सक्रिय नक्सली दलम अब तेजी से फ्रंटफुट पर आ रहे हैं।

जंगल में बसे गांवों में अपनी ताकत बढ़ाने पनाह ले रहे नक्सलियों का नेटवर्क ब्रेक करने के लिए पुलिस जहां उन्हीं की तर्ज पर गांवों में अपनी पहुंच और सूचना तंत्र को मजबूत कर रही है। वहीं नक्सली इन गांवों को अपने कब्जे में लेने के लिए गांव-गांव बैठक ले रहे हैं।

फील्ड ट्रेनिंग कैंप की तैयारी में नक्सली

विस्तार दलम के विस्तार के लिए नक्सलियों ने एक और प्लाटून बढ़ाई है। वहीं कान्हा- अचानकमार के कॉरीडोर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नए दलम का गठन भी किया है। कान्हा-भोरमदेव दलम के सदस्यों को बालाघाट में सक्रिय अन्य दलम मलाजखंड-तांडा दलम के साथ एरिया मैपिंग कर रहे हैं। गांवों में अपना संवाद बढ़ाकर ग्रामीणों के बीच अपना नेटवर्क भी बढ़ा रहे हैं।

एकेडमी ट्रेनिंग कैंप की तैयारी

  • बारिश में फील्ड ट्रेनिंग के बाद शुरू होती है एकेडमी ट्रेनिंग।
  • 8 से 10 स्थानों पर ट्रेनिंग कैंप से पूर्व जुटा लेते हैं राशन और अन्य जरूरत का सामान।
  • 2 से 8 दिसंबर तक मनाया जाता है पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) सप्ताह ।
  • 2 से 8 दिसंबर तक संगठन में होती है नई भर्ती।
  • इसके बाद शुरू होती है ट्रेनिंग।
  • मार्च के बाद शुरू होता एरिया सर्वे।
  • 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीद सप्ताह होता है।
  • 3 अगस्त के बाद शुरू होता फील्ड ट्रेनिंग कैंप।
  • बारिश में कम हो जाती ही पुलिस की मुखबिरी।
  • ट्रेनिंग कैंप के लिए भी जगह बदलते रहते हैं नक्सली।

इन गांवों के पास लगाते हैं कैंप

सायर-संदूका, टेमनी, कोरका-बोंदारी, मलकुआ, चिलकोना, राशिमेटा, कोदापार, पितकोना, चौरिया, चिलौरा, कोसुम्बहरा, धीरी, मुरुम, मलायदा, सीतापाला, कटेमा, कट्टीपार में नक्सली बारिश में कैंप लगाते हैं। नए स्थान के लिए दमोह, सालेटेकरी, मछुरदा व छत्तीसगढ़ से लगे मंडई, चिल्पी का चयन करते हैं।

  • अब नक्सलियों का अगला लक्ष्य

  • पुलिस का मुखबिर सूचना तंत्र तोड़ना चाह रहे नक्सली।
  • पुलिस चौकी और मोबाइल टावर व मुखबिर निशाने पर।
  • आय स्रोत बढ़ाने बढ़ा रहे ताकत।

7 साल बाद बालाघाट में पुलिस का गोली का निशाना बने नक्सली

बालाघाट के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों का पिछले सात सालों में 8 बार पुलिस से सामना हुआ है, लेकिन सात साल बाद पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है।

खास बात यह है कि 26 मई को 2012 को पचामा-दादर की पहाड़ी में हुए एनकाउंटर में भी पुलिस पार्टी ने दो नक्सलियों को ढेर किया था, जिसमें से एक ही नक्सली का शव बरामद हो पाया था। एक शव नक्सली साथ ले गए थे, लेकिन इस बार नक्सलियों का भागना भी मुश्किल हो गया था। इससे पुलिस ने दो नक्सलियों को ढेर कर उनके शव भी मौके से बरामद किया है।

इनका कहना है

वारदात के बाद से जिले के जंगल में हालात सामान्य हैं, पुलिस सर्चिंग बढ़ा दी गई है। नक्सली जिले में किसी बड़ी वारदात को अंजाम न दे सकें इसके लिए पुलिस पूरी तरह अलर्ट है।

- केपी वेंकटेश्वर राव, आईजी बालाघाट