
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। आदिवासी बाहुल्य बालाघाट जिले की तहसील बैहर, बिरसा और परसवाड़ा में बीमारी से अब तक करीब 29 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत और 300 से अधिक मासूमों के अस्पतालों में भर्ती होने की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। इस घटना के विरोध में गुरुवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचल चारों घूंट बंद रहा।
सुबह से ही बंद का व्यापक असर दिखा। जिला मुख्यालय में विशाल जन आक्रोश रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी की संख्या में आदिवासी युवा, बैगा समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी "न्याय दो या कुर्सी छोड़ो! मासूमों की मौत का हिसाब दो! के नारे लगाते हुए प्रमुख मार्गों से गुजरे।
रैली के बाद आयोजित आम सभा में वक्ताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा।वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ये मौतें बीमारी से नहीं, बल्कि मोहन यादव सरकार और जिला स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही से हुई हैं। बैहर-बिरसा जैसे सुदूर वनांचलों में समय पर डाक्टर नहीं पहुंचे, दवाओं की कमी रही और स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं का अभाव रहा।
सभा में मांग की गई कि मृत बच्चों के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए, दोषी अधिकारियों को निलंबित कर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और प्रभावित गांवों में स्थायी स्वास्थ्य शिविर, एंबुलेंस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात की जाए। चेतावनी दी गई कि न्याय न मिलने पर आंदोलन प्रदेशव्यापी किया जाएगा।
बंद के दौरान अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी प्रतिष्ठान बंद रहे। बस और ऑटो संचालन ठप होने से ग्रामीणों और छात्रों को परेशानी हुई। बस स्टैंड में बस संचालन काे लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच बहस की स्थिति भी बनी, जिसे पुलिस ने समझाइश देकर शांत कराया।
सराफा मार्केट, सब्जी मंडी, अनाज मंडी, किराना और शराब दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। चौक-चौराहों पर चाय-नाश्ते के ठेले भी बंद होने से लोगों को चाय-पानी के लिए भटकना पड़ा। बैहर, बिरसा, परसवाड़ा, वारासिवनी और कटंगी में भी बंद का शत-प्रतिशत असर रहा।
बंद का आह्वान आदिवासी युवा साथी और बैगा समाज ने किया था, जिसे सर्व समाज का समर्थन मिला। पंवार क्षत्रिय समाज ने पूर्ण समर्थन देते हुए व्यापारियों से सहयोग की अपील की थी। लोधी समाज, बौद्ध समाज, ओबीसी महासभा, बिरसा ब्रिगेड, भीम आर्मी, राष्ट्रीय क्रांति मोर्चा और मुस्लिम समाज भी बंद में शामिल रहे।
बंद के दौरान काली पुतली चौक से लेकर आंबेडकर चौक तक मार्ग बंद रहने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने पहले से ही इंतजाम कर लिए थे और इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों के लिए डायवर्ट मार्ग भी पहले ही तय कर लिया था।