
नईदुनिया प्रतिनिधि, बड़वानी। जिला मुख्यालय के समीप नर्मदा नदी पर बने पुल पर बीते एक दशक से सुसाइड करने वालों का सिलसिला नहीं थम रहा हैं। लगातार हो रही घटनाओं से नर्मदा नदी पर बना डेढ़ किमी पुल को सुसाइड पॉइंट से छुटकारा नहीं मिल पा रहा हैं। हाल ही में बीते एक माह की अवधि में तीन लोगों ने पुल से छलांग लगाई। इन तीनों की जान पुल की रैलिंग से रस्से के सहारे बंधी लाइफ सपोर्ट रिंग से बची। इसके अलावा पुल पर सुरक्षा या बचाव के कोई इंतजाम नहीं है।
पुल से मंगलवार सुबह एक बुजुर्ग ने छलांग लगा दी। गनीमत रही कि जैसे ही बुजुर्ग ने नर्मदा में छलांग लगाई, वैसे ही पुल की रैलिंग से रस्से के सहारे बंधी लाइफ सपोट रिंग लटकी थी, जिसे बुजुर्ग ने पकड़ लिया। इसके बाद नाव के माध्यम से उसे सुरक्षित किनारे लाया गया।
कोतवाली पुलिस के अनुसार बुजुर्ग समीप धार जिले के निसरपुर गांव का निवासी हैं, जो अपने गांव से बड़वानी की ओर बाइक से आ रहा था। पुल पर दूध की कैन लदी बाइक को खड़ी कर उसने नर्मदा में छलांग लगा दी। इसके बाद उसने पुल किनारे लाइफ सपोट रिंग पकड़ ली। एसडीआरएफ टीम ने उसे नाव के माध्यम से किनारे लगाया और थाने लेकर आए। पुलिस ने बुजुर्ग का प्राथमिक स्वास्थ्य चेकअप कराया। बुजुर्ग के नर्मदा में कूदने के मामले को पुलिस ने जांच में लिया।
बता दें कि बीते एक माह के दौरान उक्त पुल से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश करने वालों की यह तीसरी वारदात है। इसके पूर्व गत 11 अप्रैल को एक बुजुर्ग ने छलांग लगाई थी। वहीं उसके दूसरे दिन एक युवक ने पारिवारिक कारणों के चलते नर्मदा में कूद गया था। वहीं मंगलवार सुबह करीब 8 बजे फिर एक बुजुर्ग ने नर्मदा पुल से छलांग लगाई। उक्त तीनों घटनाओं में लाइफ सपोर्ट रिंग की मदद से तीनों लोगों की जान बच पाई। नागरिकों का कहना हैं कि शासन ने नर्मदा पार आवागमन के लिए पुल बनाकर कर्तव्य से इतिश्री कर ली, सुरक्षा को लेकर बीते डेढ़ दो दशक में यहां कोई इंतजाम नहीं हो पाए।
उल्लेखनीय है कि पुल पर बीते वर्षों में लगाए गए कैमरे बंद है। जिस पुल से कूदने वाले लोगों की जानकारी रिकॉर्ड नहीं हो पाती। साथ ही दिन के साथ रात में कई बार लोग अचानक से छलांग लगा देते हैं। जिससे किसी को पता नहीं चल पाता। ऐसे में पुल पर किसी की बाइक चप्पल या अन्य सामग्री मिलने पर किसी के कूदने या छलांग लगाने के आशंका के बाद सर्चिंग की जाती है।
पुल से किसी के कूदने-छलांग लगाने की सूचना पर ही एसडीआरएफ टीम पहुंचती हैं, 24 घंटे इनकी यहां तैनाती नहीं दिखती। एक दशक से हो रही रेलिंग बढ़ाने की मांग पुल से कूदने की आए दिन होने वाली घटनाओं की रोकथाम के लिए सामाजिक संगठनों द्वारा सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने पुल के रेलिंग ऊंची करने की मांग की जा रही है।
नर्मदा पुल के दोनों और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। कई बार आवेदक-ज्ञापन दिए गए। साथी व्यापक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाए गए, लेकिन जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक कोई हलचल देखने को नहीं मिली। इन अनदेखी के चलते आए दिन पुल से छलांग लगाने की घटनाएं होने लगी है। जिससे नर्मदा का बड़े पुल की पहचान सुसाइड पाइंट के रुप में होने लगी है।
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