
युवराज गुप्ता, नईदुनिया, बड़वानी : पानी की हर बूंद सहेजने का संकल्प हो तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बड़वानी में राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) की छात्राएं इसी सोच के साथ जल संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं।
कहीं बहते नालों के पानी को बोरी बंधान बनाकर रोका जा रहा है, तो कहीं वर्षाजल को जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। छात्राएं केवल श्रमदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांवों में लोगों को जल संरक्षण के महत्व और इसके लाभ भी समझा रही हैं।
बोरी बंधान से सहेजा पानी, सिंचाई में मिला सहारा
रासेयो की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा पलक गुप्ता ने बताया कि उन्हें जल संरक्षण के लिए बोरी बंधान बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उन्होंने महाविद्यालय के स्वयंसेवकों को प्रेरित किया और गांवों में जाकर जनजागरूकता अभियान चलाया। पहाड़ी क्षेत्रों में बहने वाले छोटे नदी-नालों के पानी को सहेजने के लिए ग्राम पंचायत सजवानी, धमनई और बड़गांव में बोरी बंधान बनाए गए।
इन बंधानों से बहते पानी को रोककर सिंचाई के उपयोग में लाने का प्रयास किया गया। पलक के अनुसार, रुके हुए पानी से आसपास के कुओं और ट्यूबवेल के जलस्तर में भी सुधार हुआ। हैंडपंप में पानी की उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए भी मदद मिली। इस तरह जल संरक्षण के इन प्रयासों से किसानों और ग्रामीण परिवारों को लाभ पहुंचा।
15 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए
वर्षाजल को सहेजने की दिशा में छात्रा तमन्ना गोथले भी लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वाटर हार्वेस्टिंग का उद्देश्य बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोककर जमीन के भीतर पहुंचाना है, ताकि भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सके। इससे कुओं, ट्यूबवेल और हैंडपंप को रिचार्ज करने में सहायता मिलती है।
तमन्ना के अनुसार, स्वयंसेवकों के सहयोग से ग्राम पंचायत बड़गांव और महाविद्यालय परिसर में वर्षाजल संरक्षण के लिए कुल 15 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किए गए। इसके साथ ही ग्राम बड़गांव में कार्यशाला आयोजित कर लोगों को इस व्यवस्था के लाभ बताए गए। जागरूकता का असर यह हुआ कि कुछ ग्रामीणों ने भी अपने घरों के आसपास गड्ढे बनाकर वर्षाजल को जमीन में सहेजने का प्रयास शुरू किया।
जागरूकता के साथ श्रमदान पर जोर
रासेयो इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डा. रणजीत सिंह मेवाड़े और डा. रंजना चौहान ने बताया कि छात्राओं ने छात्रों के साथ मिलकर जल संरक्षण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी की। नदी-तालाबों के तटों की सफाई, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने और वर्षाजल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।
इन प्रयासों के माध्यम से छात्राएं यह संदेश दे रही हैं कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयासों से भी मजबूत हो सकता है। बारिश के पानी को सहेजना और उपलब्ध जलस्रोतों को सुरक्षित रखना भविष्य की जल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।