
नईदुनिया प्रतिनिधि, बड़वानी : जिला अस्पताल बड़वानी में एक महिला कर्मचारी द्वारा सिविल सर्जन डा. मनोज खन्ना के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मामला चर्चा में है।
महिला ने महिला थाने में शिकायती आवेदन देकर यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग और कार्यस्थल पर भय का माहौल बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। महिला ने मामले में एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उसका दावा है कि वह पिछले दो दिनों से शिकायत दर्ज कराने के लिए महिला थाने के चक्कर लगा रही है।
फिलहाल मामला जांच के चरण में है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं अस्पताल प्रबंधन द्वारा कर्मचारी की उपस्थिति को लेकर प्रस्तुत किए गए तथ्यों पर भी अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के बाद ही सामने आएगी।
महिला की शिकायत के अनुसार उसके 71 वर्षीय पिता अप्रैल में गंभीर रूप से बीमार हुए थे और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी देखभाल के लिए उसने अवकाश आवेदन के साथ मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। महिला का आरोप है कि इसके बावजूद अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया और करीब 75 दिनों का वेतन रोक दिया गया।
वेतन और अवकाश को लेकर बातचीत के दौरान कथित अनुचित व्यवहार किए जाने का भी उसने आरोप लगाया है। शिकायत में 5 अगस्त की कथित घटना का उल्लेख करते हुए हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के दौरान अभद्र व्यवहार और धक्का दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा वर्ष 2023 की एक कथित घटना का भी शिकायत में उल्लेख है। महिला ने लगातार दबाव के कारण स्वयं को कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस करने की बात कहते हुए निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और आरोप सही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
इसी बीच जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी यूनिट में कार्यरत महिला की उपस्थिति को लेकर अस्पताल प्रबंधन का अलग प्रतिवेदन सामने आया है। इसमें निर्धारित ड्यूटी समय पर अनुपस्थित रहने और इसके कारण मरीजों को फिजियोथेरेपी सेवा प्रभावित होने की बात कही गई है।
जिला अस्पताल के अधिकारियों ने इस संबंध में कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा है। प्रतिवेदन के अनुसार अप्रैल-मई की उपस्थिति के साथ जून-जुलाई की उपस्थिति का भी अवलोकन किया गया, जिसमें कई अवसरों पर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने तथा निर्धारित समय के बाद उपस्थिति दर्ज किए जाने का उल्लेख है।
फिजियोथेरेपी विभाग में मरीजों के उपचार के लिए सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तथा शाम 5 से 6 बजे तक का समय निर्धारित बताया गया है।शिकायत के बाद 4 अगस्त को ट्रामा सेंटर भवन स्थित फिजियोथेरेपी यूनिट का निरीक्षण किया गया। प्रतिवेदन में सुबह 10:52 बजे तक अनुपस्थिति का उल्लेख है।
वहीं 5 अगस्त को कलेक्टर के निर्देश पर किए गए पुनः निरीक्षण में 11.16 बजे तक उपस्थित नहीं होने की बात दर्ज है। 1 सितंबर को उपचार के लिए पहुंचे एक मरीज द्वारा भी संबंधित कर्मचारी के ड्यूटी पर नहीं होने की जानकारी दिए जाने का उल्लेख प्रतिवेदन में किया गया है।
अस्पताल प्रबंधन ने मामले में कार्यालयीन कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी दी है। प्रतिवेदन में कार्रवाई के दौरान संबंधित कर्मचारी द्वारा अधिकारियों पर आरोप लगाए जाने और सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किए जाने की बात भी कही गई है। वहीं पुलिस अधीक्षक को भी महिला के विरुद्ध लिखित शिकायत की गई है।
महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप निराधार व झूठे हैं। मैंने किसी प्रकार का यौन उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार नहीं किया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों से मेरा कोई संबंध नहीं है।संबंधित महिला कर्मचारी समय पर अस्पताल नहीं आती है। बिना बताए छुट्टी पर चली जाती है। अनुपस्थिति का पूरा प्रकरण बनाकर भोपाल भी भेजा गया है। -डॉ. मनोज खन्ना, सिविल सर्जन जिला अस्पताल बड़वानी
सिविल सर्जन के विरुद्ध शिकायती आवेदन प्राप्त हुआ है। संबंधित विभाग द्वारा अपने स्तर पर कमेटी गठित कर मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर पुलिस द्वारा आगामी कार्रवाई की जाएगी। -सुनीता मुजाल्दा, थाना प्रभारी महिला थाना बड़वानी
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