
Tribal Pride Day Special: युवराज गुप्ता, बड़वानी। निमाड़ के आदिवासी जनयोद्धा भीमा नायक की प्राचीन गढ़ी बड़वानी जिले में सतपुड़ा की पहाड़ी के शिखर पर मौजूद है और यह जर्जर अवस्था में है। इसी गढ़ी से 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों से पहला संग्राम निमाड़ में भीमा नायक का हुआ था। जनजातीय गौरव की प्रतीक 170 साल पुरानी इस गढ़ी से प्रमुख रास्तों की निगरानी की जाती थी। बताया जाता है कि अंग्रेजों से हुए युद्ध के दौरान दागी गई गोलियों के निशान भी हैं।
बड़वानी के वरिष्ठ इतिहासविद व पूर्व कुलपति डा. शिवनारायण यादव के अनुसार गांव धाबा बावड़ी से सिलावद तक अंग्रेजों द्वारा सड़क बनाई गई थी। ब्रिटिशकाल में गोई घाटी में जाने के लिए इस विशेष चेकपोस्ट को बनाया गया था। यह चेकपोस्ट ही वह गढ़ी है, जहां से भीमा नायक द्वारा रास्तों की निगरानी की जाती थी।
उनकी टीम द्वारा गोरिल्ला युद्ध की व्यूहरचना भी की जाती थी। वर्ष 1857 में अंग्रेजों और जनयोद्धा भीमा नायक के बीच युद्ध हुआ था। भीमा नायक और अंग्रेजों के बीच तीन बार बड़े संग्राम हुए। इस दौरान अंग्रेज भीमा नायक को पकड़ नहीं पाए।
करीब दस साल बाद वर्ष 1867 में कुछ विश्वासघाती लोगों के कारण भीमा नायक को धोखे से पकड़कर उन पर मुकदमा चलाया गया। उनके कई क्रांतिकारी साथियों को सजा-ए-मौत दी गई लेकिन भीमा नायक को फांसी देने की हिम्मत अंग्रेजों में नहीं थी, इसलिए उनको आजीवन कारावास की सजा देकर कालापानी पोर्ट ब्लेयर की जेल में भेजा गया था। यहीं पर 29 दिसंबर 1876 में जेल में ही उनका निधन हुआ था।
गोरिल्ला युद्ध की रणनीति में माहिर थे
इतिहासविदों के अनुसार बलिदानी भीमा नायक उस समय साहसी योद्धा रहे। गोरिल्ला युद्ध की रणनीति में माहिर होने के कारण कई बार अंग्रेजों से भिड़े और युद्ध में हराया।
असली गढ़ी और बावड़ी का संरक्षण हो, स्मारक के रूप में करें विकसित
क्षेत्र के इतिहासविदों व समाजसेवियों के अनुसार धाबा बावड़ी में सतपुड़ा की पहाड़ी पर स्थित असली गढ़ी और तलहटी में मौजूद प्राचीन बावड़ी का संरक्षण किया जाना जरूरी है। इसे एक स्मारक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
संरक्षण जरूरी
सड़क व भवन निर्माण के विशेषज्ञ इंजीनियर प्रितेश रावत के अनुसार पहाड़ी पर बनी यह गढ़ी आजादी के पहले का बेजोड़ निर्माण का उदाहरण है। करीब 170 साल पहले बनी इस गढ़ी में उस समय के जानकारों ने चूना, ईंट व सरस से जुड़ाई कर बेहतर भवन तैयार किया । यह ऐसा भवन है, जो पहाड़ी पर आंधी, वर्षा और गर्मी को सहन कर हमेशा खड़ा रहो। वर्तमान में कुछ शरारती तत्वों ने इसे भी कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त किया है। जीर्ण-शीर्ण हो चुकी इस विशेष गढ़ी को शासन-प्रशासन द्वारा संरक्षित किया जाना चाहिए।
इनका कहना है
जनयोद्धा भीमा नायक की प्राचीन गढ़ी को संरक्षित कराएंगे। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटक और क्षेत्र के युवा जनयोद्धा के इस ऐतिहासिक स्थल और इतिहास से रूबरू हो सकें। गढ़ी के संरक्षण और विकास के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेंगे।
-गजेंद्रसिंह पटेल, सांसद खरगोन बड़वानी लोकसभा क्षेत्र