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एमपी मेट्रो का फर्जी ऑफर लेटर देकर युवक से लाखों रुपये ऐंठे और जाइनिंग के नाम पर करता रहा गुमराह

पैसे वापस मांगने पर उसने पीड़ित का मोबाइल नंबर तक ब्लाॅक कर दिया। पुलिस के अनुसार, शक्ति नगर गौठाना निवासी मयूर मालवीय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फरवरी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 11:05:58 PM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 07:18:32 AM (IST)
एमपी मेट्रो का फर्जी ऑफर लेटर देकर युवक से लाखों रुपये ऐंठे और जाइनिंग के नाम पर करता रहा गुमराह
एमपी मेट्रो।

HighLights

  1. एमपी मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर।
  2. 3.54 लाख की ठगी करने वाला।
  3. डेढ़ साल बाद गिरफ्तार किया गया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। एमपी मेट्रो में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 3.54 लाख रुपये की ठगी करने वाले फरार आरोपित को कोतवाली पुलिस ने डेढ़ साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर पहले भरोसा जीता, फिर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया और लंबे समय तक जाइनिंग का झांसा देता रहा।

पैसे वापस मांगने पर उसने पीड़ित का मोबाइल नंबर तक ब्लाॅक कर दिया। पुलिस के अनुसार, शक्ति नगर गौठाना निवासी मयूर मालवीय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फरवरी 2024 में आरोपित आलोक कुमार बामने ने एमपी मेट्रो में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया।


इस दौरान उसने अलग-अलग किश्तों में 3 लाख 49 हजार रुपये ऑनलाइन और 5 हजार रुपये नकद लेकर कुल 3 लाख 54 हजार रुपये वसूल लिए। आरोपित ने दावा किया था कि उसकी उच्च स्तर पर पहचान होने के कारण नौकरी आसानी से लग जाएगी।

शिकायत के अनुसार मार्च 2024 में आरोपित ने पीड़ित को एमपी मेट्रो का कथित नियुक्ति पत्र भी सौंप दिया। इसके बाद वह कभी 10 दिन, कभी 15 दिन तो कभी अगले सप्ताह जाइनिंग कराने का आश्वासन देकर लगातार टालता रहा। जब पीड़ित को संदेह हुआ और उसने अपनी राशि वापस मांगी तो आरोपित ने संपर्क तोड़ दिया तथा उसका मोबाइल नंबर ब्लाक कर दिया।

पीड़ित ने आरोपित से भोपाल में मुलाकात की तो उसने राशि लौटाने के नाम पर बैंक का चेक दिया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण वह चेक लगातार तीन बार बाउंस हो गया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसने नौकरी की उम्मीद में यह रकम ऋण लेकर जुटाई थी और उस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता गया।

शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2024 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। आरोपित लंबे समय से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। लगातार तलाश और तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को उसकी लोकेशन मिली, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपित ने अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।