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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 09, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महिषासुर जड़ता रूप में हम सभी में विद्यमान है-देवी वैभव श्री

देवी भागवत कथा सुनने उमड़ रहे श्रद्घालु फोटो------9बीटीएल 31 मुलताई। झांकियों के साथ प्रवचन देती भागवताचार्य। फोटो------9बीटीएल 32 मुलताई। कथा सुनने उम...और पढ़ें

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Publish Date: Sat, 09 Feb 2019 07:27:32 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 Feb 2019 07:27:32 PM (IST)
महिषासुर जड़ता रूप में हम सभी में विद्यमान है-देवी वैभव श्री

देवी भागवत कथा सुनने उमड़ रहे श्रद्घालु

फोटो------9बीटीएल 31

मुलताई। झांकियों के साथ प्रवचन देती भागवताचार्य।

फोटो------9बीटीएल 32

मुलताई। कथा सुनने उमड़ रहे श्रद्घालु।

मुलताई। नगर में मासोद रोड पर स्थित ज्ञानेश्वर मंदिर में नौ कुंडीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ के आयोजन के साथ सात दिवसीय देवी भागवत कथा का भी आयोजन किया गया। महाराष्ट्र से आई भागवताचार्य देवी वैभव श्री द्वारा देवी भागवत पर प्रवचन दिए जा रहे हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि महिषाषुर रूपी राक्षस जड़ता के रूप में हम सबमें विद्यमान है। जड़ वस्तुओं के चिंतन से हम भी जड़ होते जा रहे हैं, केवल देवी स्मरण करने से ही इस जड़ता को समाप्त किया जा सकता है।

मां भगवती की आराधना से सभी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। आवश्कता है उनका ध्यान सच्चे मन से और निष्कपट होकर किया जाए। द्वावर युग में वसुदेव और देवकी ने भी देवी का अनुष्ठान करवाया था। इसके बाद ही उनके घर सातवीं संतान के रूप में देवी महामाया और आठवीं संतान के रूप में भगवान नारायण ने जन्म लिया। मां की आराधना से सभी वांछित फलों की प्राप्ति आसानी से होती है, इसलिए सभी को मां दुर्गा की आराधना करना चाहिए। उक्त प्रवचन शनिवार को पूना से आई भागवताचार्य वैभव श्री द्वारा मासोद रोड स्थित ज्ञान मंदिर में देवी भागवत के आयोजन के दौरान कही। मंदिर में रोजाना भगवान शिव का आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है। बीती रात भगवान शिव का हनुमान श्रृंगार किया गया। रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्घालु इस अनुष्ठान में पहुंच रहे हैं और महायज्ञ में आहुतियां डाल रहे हैं। सहस्त्र चंडी महायज्ञ की शुरूआत सोमवार को ताप्ती तट से विशाल चुनरी यात्रा के साथ की गई थी। इसके बाद से लगातार महायज्ञ में विभिन्न अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं।


6 फरवरी से प्रतिदिन सुबह मंडल एवं देवीपूजन तथा प्रतिदिन शाम 4 बजे से दुर्गा सप्तशती पाठ एवं हवन संपन्ना हो रहा हैं। शुक्रवार 8 फरवरी से प्रारंभ होकर 14 फरवरी तक दोपहर 12 बजे से 3.30 बजे तक श्रीमद देवी भागवत संपन्ना हो रही है। देवी वैभव श्री ने कहा कि बुद्घि, बल, तेज, लक्ष्मी, वैभव, प्रष्तिठा आदि की प्राप्ति मां दुर्गा की आराधना से प्राप्त होती है। सत्संग या कथा में बैठकर अपने जीवन को टटोलना चाहिए। पुराणों की कथा हमारे जीवन में हर पल घटते रहती है। कथा में मिलने वाले सूत्रों को अपने जीवन में उतारना चाहिए। वर्तमान में किए कर्म ही भूतकाल एवं भविष्काल में चिंता का कारण बनते हैं, इसलिए वर्तमान समय में सुकर्म करें और हर तरह की चिंता से मुक्त रहें। सुख हमारे अच्छे कर्मो का फल है, वहीं जब दुख आए तो समझ लेना चाहिए कि अच्छे काम करने का समय आ गया है।