• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • बैतूल

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गुरु अरजन देव के शहीदी दिवस पर गुरूद्वारा में सजेंगे कीर्तन दीवान

बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अपना पूरा जीवन धर्म और लोगों की सेवा के लिए न्यौछावर करने वाले सिखों के पांचवें गुरु अरजन देव जी का तीन जून को बलिदान दिवस...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Mon, 30 May 2022 07:15:43 PM (IST)Updated Date: Mon, 30 May 2022 07:15:43 PM (IST)
गुरु अरजन देव के शहीदी दिवस पर गुरूद्वारा में सजेंगे कीर्तन दीवान

बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अपना पूरा जीवन धर्म और लोगों की सेवा के लिए न्यौछावर करने वाले सिखों के पांचवें गुरु अरजन देव जी का तीन जून को बलिदान दिवस है। गुरु अरजन देव का जीवन हमें धर्म के लिए कुर्बान हो जाने की सीख देता है। तेरा किया मीठा लागे, हर नाम पदारथ नानक मांगे कहते हुए उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये। शहीदी दिवस को लेकर एक मई से गुरूद्वारा गुरु सिंग सभा में सभी गुरुनानक नाम लेवा संगत द्वारा श्री सुखमनी साहेब जी के पाठ का आयोजन किया जा रहा है, यह पाठ तीन जून तक प्रतिदिन चलेंगे। गुरु अरजन देव जी के शहीदी पूरब के दिन तीन जून को सुबह शाम कीर्तन दीवान सजेंगे। जिसमें सुबह शहर के विभिन्ना स्थानों में शरबत और काले छोले का प्रसाद वितरण किया जाएगा। शाम को आठ बजे कीर्तन दीवान के बाद गुरु का लंगर का आयोजन होगा। गौरतलब है कि गुरु अरजन देव जी धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे सेवक थे और उनके मन में सभी धर्मों के लिए सम्मान था। मुगलकाल में अकबर, गुरु अरजन देव के मुरीद थे, लेकिन जब अकबर का निधन हो गया तो इसके बाद जहांगीर के शासनकाल में इनके रिश्त में खटास पैदा हो गई। ऐसा कहा जाता है कि शहजादा खुसरो को जब मुगल शासक जहांगीर ने देश निकाला का आदेश दिया था, तो गुरु अरजन देव ने उन्हें शरण दी। यह वजह थी कि जहांगीर ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। गुरु अरजन देव ईश्वर को याद कर सभी यातनाएं सह गए और 30 मई 1600 को शहीद हो गए।