
बैतूल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अपना पूरा जीवन धर्म और लोगों की सेवा के लिए न्यौछावर करने वाले सिखों के पांचवें गुरु अरजन देव जी का तीन जून को बलिदान दिवस है। गुरु अरजन देव का जीवन हमें धर्म के लिए कुर्बान हो जाने की सीख देता है। तेरा किया मीठा लागे, हर नाम पदारथ नानक मांगे कहते हुए उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये। शहीदी दिवस को लेकर एक मई से गुरूद्वारा गुरु सिंग सभा में सभी गुरुनानक नाम लेवा संगत द्वारा श्री सुखमनी साहेब जी के पाठ का आयोजन किया जा रहा है, यह पाठ तीन जून तक प्रतिदिन चलेंगे। गुरु अरजन देव जी के शहीदी पूरब के दिन तीन जून को सुबह शाम कीर्तन दीवान सजेंगे। जिसमें सुबह शहर के विभिन्ना स्थानों में शरबत और काले छोले का प्रसाद वितरण किया जाएगा। शाम को आठ बजे कीर्तन दीवान के बाद गुरु का लंगर का आयोजन होगा। गौरतलब है कि गुरु अरजन देव जी धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे सेवक थे और उनके मन में सभी धर्मों के लिए सम्मान था। मुगलकाल में अकबर, गुरु अरजन देव के मुरीद थे, लेकिन जब अकबर का निधन हो गया तो इसके बाद जहांगीर के शासनकाल में इनके रिश्त में खटास पैदा हो गई। ऐसा कहा जाता है कि शहजादा खुसरो को जब मुगल शासक जहांगीर ने देश निकाला का आदेश दिया था, तो गुरु अरजन देव ने उन्हें शरण दी। यह वजह थी कि जहांगीर ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। गुरु अरजन देव ईश्वर को याद कर सभी यातनाएं सह गए और 30 मई 1600 को शहीद हो गए।