बीना (नवदुनिया न्यूज)। हड़प्पा सभ्यता की समकालीन संस्कृति को अपने आप में समेटे एतिहासिक नगर ऐरण का इतिहास जानने के लिए जनवरी 2021 में एएसआइ (आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया) की उत्खनन शाखा नागपुर ने उत्खनन शुरू किया था। गांव के बीचोंबीच करीब 10 मीटर लंबाई और चौड़ाई में उत्खनन गया है। उत्खनन में 3900 साल पुराने कई अवशेष मिले हैं। इसमें ताम्र पाषाणकालीन बहुमूल्य बर्तन, सिक्के और हड्डियां मिली हैं। इन पर शोध कार्य चल रहा है। फिलहाल सितंबर 2021 से उत्खनन बंद हैं। लेकिन अब जल्द उत्खनन शुरू होने की उम्मीद है। उत्खनन में महान सम्राट समुद्र गुप्त के महल के अवशेष मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि बीना शहर से करीब 23 किलोमीटर बीना नदी के किनारे बसे ऐरण गांव का ऐतिहासिक महत्व है। अलग-अलग समय पर किए गए शोध और उत्खनन में सिंधु घाटी में विकसित हुई हड़प्पा संस्कृति की समकालीन सभ्यता विकसित होने के अवशेष मिल चुके हैं। इसके चलते एएसआइ ने ऐरण में उत्खनन शुरु किया है। पिछले साल जनवरी से सितंबर माह तक चले उत्खनन में 21वीं सदी से लेकर ईसापूर्व 18 सौ साल पुरानी संस्कृति के अवशेष मिले हैं। इसमें पत्थर के मजबूत ब्लेड, तांबे के सिक्के, लोहे के बाण फलक, पक्की मिट्टी के कीमती बर्तन, गले में पहने वाले हार के मनके (बीड्स), अर्द्धकीमती पत्थरों के मनके, स्टीटाइट, जास्पर, कांच के मनके सहित खाना खाने के उपयोग में आने वाले पक्की मिट्टी के बर्तन हैं। इसके अलावा मिट्टी से पकी हुईं पशु-पक्षियों की मूर्तिया एंव मिट्टी के छोटे बर्तन प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही अनाज पीसने वाली पत्थर की चक्की, मूसल, मसाले पीसने वाले सिलबट्टा सहित दैनिक उपयोग में आने वाली बहुत सी वस्तुएं शामिल हैं। उत्खनन शाखा प्रभारी डा. मनोज कुमार कुर्मी ने उत्खनन रिपोर्ट भारत सरकार को सौप दी है। आगे का इतिहास जानने के लिए दोबारा उत्खनन शुरू किया जाना है। इसके लिए इसी साल जनवरी में इजाजत मिल चुकी है, लेकिन उत्खनन करने वाले विशेषज्ञों की कमी के कारण अब तक उत्खनन शुरू नहीं हो पाया है। परियोजना से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उत्खनन के लिए नागपुुर से जल्द टीम आने की उम्मीद है।
इन राजवंशों ने किया है राज
अलग-अलग समय पर हुए उत्खनन, शोध और ऐरण में मिले अभिलेखों से पता चला है कि प्राचीन नगर ऐरण में कई राजवंशों ने राज किया है। इनमें मुख्य रूप से मौर्य वंश, सातवाहन, शुंग, नागवंश, शक-छत्रप, गुप्तवंश, हूण, चंदेल, परमार-गुर्जर, प्रतिहार, गौड राजवंश, मुगल शासकों के साथ-साथ अंग्रेजी शासन के अनेक प्रमाण मिले है। ऐरण में उत्खनन से राष्ट्रीय महत्व की अनेक पुरावशेष मिलने की उम्मीद है। ऐरण पर शोध करने वाले अमरकंटक विश्व विद्यालय के प्रो. मोहन लाल चढ़ार का कहना है कि आगे होने वाले उत्खनन में महान सम्राट समुद्रगुप्त के महल के अवशेष मिलने की संभावना है। इससे भारत के इतिहास को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।
जल्द शुरू हो जाएगा उत्खनन
हमारे लिए दूसरी परियोजना की जिम्मेदारी दे दी गई थी, इसके कारण उत्खनन का काम बंद है। उत्खनन दोबारा शुरू कराने के लिए नागपुर उत्खनन शाखा की टीम जल्द ऐरण पहुंचेगी और उत्खनन शुरू किया जाएगा।
- डा. मनोज कुर्मी, निदेशक, ऐरण उत्खनन परियोजना