भिंड लोक अदालत में टूटता रिश्ता जुड़ा, 76 वर्षीय दंपती ने माला पहनकर की नई शुरुआत
सेना से सेवानिवृत्त पेंशनर राधेश्याम गुप्ता के विरुद्ध उनकी पत्नी ने भरण-पोषण की याचिका दाखिल की थी। लंबे समय से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। कुटुंब ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 04:55:07 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 04:56:00 PM (IST)
बुजुर्ग दंपती को पौधा भेंट करते हुए जज कालू सिंह बारिया। नईदुनियाHighLights
- 76 की उम्र में भुलाए गिले-शिकवे
- फिर से साथ रहने का लिया संकल्प
- समझाइश से सुलझे सालों पुराने विवाद
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को कानूनी विवादों के समाधान के साथ रिश्तों को बचाने और परिवारों को टूटने से रोकने की मानवीय पहल भी देखने को मिली। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश कालू सिंह बारिया के मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत के दौरान कुटुंब न्यायालय भिंड की खंडपीठ क्रमांक-1 में वर्षों से चले आ रहे 76 वर्षीय दंपती के विवाद आपसी समझाइश और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाए गए।
न्यायालय की पहल के बाद कई दंपतियों ने पुराने मतभेद भुलाकर दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया।
सेना से रिटायर राधेश्याम के पत्नी ने भरण-पोषण की लगाई थी याचिका
लोक अदालत के दौरान सबसे भावुक क्षण बुजुर्ग पूनादेवी गुप्ता और उनके पति राधेश्याम गुप्ता के प्रकरण में देखने को मिला। सेना से सेवानिवृत्त पेंशनर राधेश्याम गुप्ता के विरुद्ध उनकी पत्नी ने भरण-पोषण की याचिका दाखिल की थी। लंबे समय से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दिलीप गुप्ता द्वारा की गई काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों ने विवाद को समाप्त कर साथ रहने पर सहमति जताई।
इसके बाद न्यायालय कक्ष में ही वृद्ध दंपती ने एक-दूसरे को माला पहनाई और जीवन के इस पड़ाव पर फिर से साथ निभाने का संकल्प लिया। इस दौरान मौजूद लोगों के लिए यह क्षण भावुक करने वाला रहा। वर्षों पुराने विवाद के बाद दोनों के चेहरे पर संतोष और खुशी नजर आई।
पौधे के साथ दिया रिश्ते बचाने का संदेश
लोक अदालत में राजीनामा करने वाले दंपतियों को न्यायालय की ओर से अनूठा उपहार भी दिया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कालू सिंह बारिया और प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय दिलीप गुप्ता ने सभी राजीनामा करने वाले जोड़ों को एक-एक हरा पौधा भेंट किया। न्यायाधीशों ने कहा कि पौधा केवल उपहार नहीं, बल्कि रिश्ते को मजबूत बनाए रखने का प्रतीक है।
दंपतियों को समझाइश दी गई कि जिस तरह पौधे को समय पर पानी, देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता होती है, उसी तरह रिश्तों को भी प्रेम, विश्वास, संवाद और समझ की जरूरत होती है। भविष्य में यदि पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी अनबन होती है तो उसे विवाद का रूप देने के बजाय आपस में बैठकर बातचीत से सुलझाने का प्रयास करें।
‘पौधे की छांव में बैठकर करें बातचीत’
प्रधान न्यायाधीश ने दंपतियों से कहा कि वे लोक अदालत से मिले पौधे को अपने घर में लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। जब भी कभी आपसी मतभेद पैदा हों, तो इसी पौधे की छांव में बैठकर एक-दूसरे से बातचीत करें और समस्या का समाधान निकालें। इससे न केवल परिवार में शांति बनी रहेगी, बल्कि पौधे के साथ रिश्ते भी मजबूत होते जाएंगे।
इस पहल से न्यायिक प्रक्रिया को मिला एक मानवीय स्पर्श
लोक अदालत की इस पहल से न्यायिक प्रक्रिया को एक मानवीय स्पर्श मिला। जहां एक ओर वर्षों से लंबित पारिवारिक विवादों का अंत राजीनामे से हुआ, वहीं दूसरी ओर दंपतियों को यह संदेश भी दिया गया कि हर विवाद का समाधान अदालत की लड़ाई नहीं, बल्कि आपसी संवाद और समझ से भी संभव है।
राजीनामा होने के बाद कई दंपती हाथों में पौधा लेकर खुशी-खुशी न्यायालय से अपने घर के लिए रवाना हुए।