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घर के नीचे मिला 18वीं सदी का गड्ढा, सुरंग की अफवाहों पर विराम; अनाज रखने में होता था इस्तेमाल

प्रारंभिक तौर पर इसे प्राचीन कुआं माना जा रहा था, लेकिन जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। गड्ढे की लंबाई करीब 10 से 12 फीट से अधिक नहीं है और इसके चा...और पढ़ें

By Manoj ShrivastavaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 05:42:27 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 05:46:59 PM (IST)
घर के नीचे मिला 18वीं सदी का गड्ढा, सुरंग की अफवाहों पर विराम; अनाज रखने में होता था इस्तेमाल
हिन्नारिया मोहल्ले में घर के नीचे हुआ गड्ढा और जांच करने पहुंची टीम। नईदुनिया

HighLights

  1. सुरंग या प्राचीन कुएं की अटकलें खारिज
  2. सुरंग या प्राचीन कुएं की अटकलें खारिज
  3. सुरंग या प्राचीन कुएं की अटकलें खारिज

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। शहर के किला रोड स्थित हिन्नारिया मोहल्ले में घरों के नीचे मिले गड्ढे को लेकर चल रही सुरंग और प्राचीन कुएं की अटकलों पर अब विराम लग गया है। मंगलवार को जिला प्रशासन और पुरातत्व संग्रहालय विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गड्ढे की जांच की। जांच के बाद पुरातत्व विभाग ने इसे करीब 18वीं सदी पुराना गड्ढा बताया है। अधिकारियों के अनुसार उस समय इस तरह के गड्ढों का उपयोग अनाज और अन्य सामान सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था।

प्राचीन कुआं, लेकिन जांच में प्रमाण नहीं

जिला संग्रहालय के प्रभारी अध्यक्ष सुल्तान सिंह अनंत ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर इसे प्राचीन कुआं माना जा रहा था, लेकिन जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। गड्ढे की लंबाई करीब 10 से 12 फीट से अधिक नहीं है और इसके चारों तरफ कुएं की तरह ईंटों की गोलाकार संरचना भी नहीं है।


इससे स्पष्ट है कि यह प्राचीन कुआं नहीं था। संभवत: पुराने समय में यहां बने मकानों के निर्माण के दौरान गड्ढे को बंद कर दिया गया होगा।

बाद में लगातार पानी जाने के कारण आसपास की मिट्टी खिसकने लगी और गड्ढा दोबारा दिखाई देने लगा। हिन्नारिया मोहल्ले में 17 सितंबर को बिजली की गड़गड़ाहट के बाद घरों के नीचे गड्ढा होने का मामला सामने आया था।

मामला सामने आने के बाद पुरातत्व टीम ने जांच की शुरू

भिंड किले से करीब 400 मीटर की दूरी पर यह गड्ढा मिलने के बाद लोगों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि कहीं यहां से कोई प्राचीन सुरंग तो नहीं गुजरती। मामला सामने आने के बाद पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई थी। शुरुआती जांच में इसे प्राचीन कुआं होने की संभावना जताई गई थी, लेकिन विस्तृत जांच में यह 18वीं सदी का भंडारण गड्ढा निकला। जांच के दौरान जिला संग्रहालय के प्रभारी अध्यक्ष सुल्तान सिंह अनंत, तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, पुरातत्व विभाग से प्रबल श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।

किले के आसपास बसी थी पुरानी आबादी

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक भिंड किले के आसपास उस समय आबादी बसी हुई थी। इसी दौरान लोगों द्वारा अनाज और अन्य सामग्री सुरक्षित रखने के लिए इस तरह के गड्ढे बनाए गए होंगे। बाद में मकानों के निर्माण और समय के साथ इनके ऊपर मिट्टी और निर्माण सामग्री डालकर इन्हें बंद कर दिया गया। भिंड किले का निर्माण 18वीं शताब्दी में भदावर राज्य के शासक गोपाल सिंह भदौरिया के समय कराया गया था। किले की संरचना आयताकार है और इसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। किले से जुड़ी कई पुरानी संरचनाएं और ऐतिहासिक अवशेष आज भी शहर में मौजूद हैं।

अटेर किले तक सुरंग की भी रही है चर्चा

भिंड किले को लेकर लंबे समय से यह चर्चा भी रही है कि यहां से अटेर रोड, नवादा और जवासा की गढ़ी होते हुए अटेर किले तक एक प्राचीन सुरंग जाती थी। मान्यता है कि तत्कालीन शासकों ने संकट के समय आवागमन के लिए इस तरह की सुरंग का निर्माण कराया था। हालांकि हिन्नारिया मोहल्ले में मिला गड्ढा उस सुरंग का हिस्सा नहीं पाया गया है। शहर के गोल मार्केट क्षेत्र में भी किले के पुराने दरवाजे की दीवार के अवशेष मौजूद हैं। इसे भदावर द्वार के रूप में विकसित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

घर के नीचे जो गड्ढा है वह संभवत: 18वीं सदी का है। उस समय इस तरह के गड्ढों में लोग अनाज या अन्य सामान रखते थे। इसकी रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठजनों को भेजी जाएगी। वहीं, नपा इस गड्ढे को बंद कराए। -सुल्तान सिंह अनंत, प्रभारी अध्यक्ष, जिला पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय।