भिंड: 152 करोड़ की कनेरा सिंचाई परियोजना का काम 2 माह से ठप, बारिश-जलभराव का बहाना; जून 2027 तक बढ़ी डेडलाइन
अधिकारियों का दावा है कि योजना का करीब 72 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कनेरा योजना पूरी होने के बाद अटेर और फूप क्षेत्र के 96 गांवों के किसानों को सिं...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 14 Sep 2026 09:28:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 14 Sep 2026 09:29:02 PM (IST)
कनेरा उद्वहन सिंचाई एवं पेयजल योजना के तहत निर्माण कार्य करते हुए (फाइल फोटो)।HighLights
- 96 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा का इंतजार।
- अफसरों का दावा -72 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
- समय-सीमा बढ़ने से अटकीं जिले की कई सिंचाई परियोजनाएं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। जिले में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से स्वीकृत सिंचाई परियोजनाएं लगातार समय-सीमा बढ़ने के कारण सवालों के घेरे में हैं। जिले की सबसे बड़ी 152.65 करोड़ रुपये की कनेरा उद्वहन सिंचाई एवं पेयजल योजना का काम पिछले करीब दो माह से बंद पड़ा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बारिश और जलभराव के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। योजना की समय-सीमा भी एक बार फिर बढ़ाकर जून 2027 कर दी गई है।
अधिकारियों का दावा है कि योजना का करीब 72 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। कनेरा योजना पूरी होने के बाद अटेर और फूप क्षेत्र के 96 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन लगातार बढ़ती समय-सीमा के कारण किसानों को इसका लाभ मिलने में अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
अनुबंध के अनुसार 30 जून 2025 तक पूरा होना था काम
कनेरा उद्वहन सिंचाई एवं पेयजल योजना का कार्य अनुबंध के अनुसार 30 जून 2025 तक पूरा होना था। निर्धारित समय सीमा में काम पूरा नहीं होने पर इसकी अवधि बढ़ाई गई। इसके बाद भी काम पूरा नहीं हो सका और अब विभाग ने इसकी डेडलाइन बढ़ाकर 30 जून 2027 कर दी है। यानी मूल समय-सीमा से करीब दो साल अधिक समय लगने के बावजूद परियोजना अभी निर्माणाधीन है। योजना में फीडर नहर की सीसी लाइनिंग समेत कई काम अभी बाकी बताए जा रहे हैं।
वहीं पिछले दो माह से काम बंद होने से परियोजना की रफ्तार और धीमी हो गई है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि बारिश के कारण निर्माण स्थल पर पानी और जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।
देरी का खामियाजा किसानों को
सिंचाई परियोजनाओं के समय पर पूरा नहीं होने का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में परियोजनाएं पूरी होने के बाद खेतों तक पानी पहुंचना था, वहां किसान अब भी बारिश और निजी सिंचाई संसाधनों पर निर्भर हैं। दूसरी ओर निर्माण में देरी के साथ परियोजनाओं की लागत बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
कनेरा परियोजना समय पर पूरी हो जाती तो अटेर और फूप क्षेत्र के 96 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सकता था। इससे खेती की लागत कम होने और कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन डेडलाइन लगातार आगे बढ़ने से किसानों को परियोजना पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
सिमार स्टाप डेम 97 फीसद काम के बाद भी दो साल अधूरा रहा
सिंचाई परियोजनाओं में देरी का एक उदाहरण मेहगांव के सिमार गांव में बना स्टाप डेम भी है। विभागीय जानकारी के अनुसार इसका करीब 97 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद भी यह करीब दो साल तक अधूरा पड़ा रहा। स्टाप डेम की एक दीवार भी टूटी हुई थी।
मामले में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत होने के बाद विभाग ने मरम्मत कराई। अधिकारियों का कहना है कि अब इसका काम पूरा कर लिया गया है। वहीं, गोहद संभाग के पाना नाला गहरीकरण कार्य की समय-सीमा भी लगातार बढ़ती रही है। इसे 29 मई 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका।
विभाग ने इसकी संभावित पूर्णता तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2024 और 2025 में अत्यधिक बारिश के कारण कार्यस्थल पर जलभराव हुआ, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुआ।
मॉनीटरिंग पर उठ रहे सवाल
जिले में सिंचाई परियोजनाओं की स्थिति को देखते हुए विभागीय मॉनीटरिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों रुपये की योजनाओं की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी काम अधूरे हैं और कई मामलों में नई डेडलाइन तय की जा रही है। कनेरा योजना का दो माह से बंद काम, पाना नाला का लंबित गहरीकरण और नुन्हाटा स्टाप डेम की लंबित निविदा बताती हैं कि परियोजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन की जरूरत है।
बारिश के चलते दो माह से कनेरा योजना का काम रुका हुआ है। अब तक 72 फीसद काम पूरा हो चुका है। बारिश के बाद फिर से काम शुरू हो जाएगा। - एमके अगरैया, एसडीओ, जलसंसाधन विभाग भिंड।