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"रोना बंद करो, गर्व करो" : भिंड के बलिदानी शैलेंद्र सिंह को अंतिम विदाई, पत्नी के साहस ने सबकी आंखें भिगोईं

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिला में सर्चिंग आपरेशन के दौरान हुए हादसे में बलिदानी हुए 4 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार स...और पढ़ें

By Shivam PandeyEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sun, 25 Jan 2026 11:11:09 AM (IST)Updated Date: Sun, 25 Jan 2026 11:11:09 AM (IST)
"रोना बंद करो, गर्व करो" : भिंड के बलिदानी शैलेंद्र सिंह को अंतिम विदाई, पत्नी के साहस ने सबकी आंखें भिगोईं
बलिदानी शैलेंद्र सिंह को अंतिम विदाई

HighLights

  1. हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
  2. बलिदानी शैलेंद्र सिंह के छह वर्षीय पुत्र भावेश भदौरिया ने पिता को मुखाग्नि दी
  3. बलिदानी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिला में सर्चिंग आपरेशन के दौरान हुए हादसे में बलिदानी हुए 4 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) के हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली, अटेर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बलिदानी के छह वर्षीय पुत्र भावेश भदौरिया ने पिता को मुखाग्नि दी।

इससे पहले जैसे ही बलिदानी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर बलिदानी को सलामी दी। उल्लेखनीय है कि डोडा जिले में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह सहित 10 जवान बलिदानी हुए थे।


पत्नी का साहस देख नम हुईं आंखें

अंतिम विदाई के दौरान बलिदानी की पत्नी शिवानी भदौरिया ने अदम्य साहस का परिचय दिया। पति के पार्थिव शरीर के पास रो रहे लोगों से उन्होंने कहा कि रोना-धोना बंद करो, इससे कुछ नहीं होगा। इसके बाद वे बलिदानी के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से बार-बार पति की बलाएं लेती रहीं। एक वीर नारी का यह हौसला देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

आखिरी बातचीत में जताया था अनहोनी का डर

पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात शैलेंद्र सिंह से उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। उस रात शैलेंद्र ने एक सपना बताया और कहा कि उन्हें कुछ अनहोनी का डर लग रहा है। शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाया था, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके बलिदान की सूचना आ गई।

परिवार की तीसरी पीढ़ी सेना में, दादा भी हुए थे बलिदानी

बलिदानी के पिता हनुमत सिंह ने नम आंखों से कहा कि उनके तीनों बेटे सेना में हैं और शैलेंद्र दूसरा पुत्र था। उन्होंने बताया कि शैलेंद्र के दादा भी सेना में थे और वर्ष 1972 में बलिदानी हुए थे। उन्होंने कहा कि आज मेरा बेटा भी देश के लिए शेर की तरह बलिदानी हुआ है।

बलिदानी के बड़े भाई देव सिंह ने बताया कि वे तीनों भाई सेना में रहे हैं, जिनमें से वे स्वयं सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि दुख तो है, लेकिन एक फौजी परिवार होने के नाते भाई के बलिदान पर गर्व भी है।

लोगों ने दी अंतिम सलामी

अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और “शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें” के नारे लगाए। मुक्तिधाम घाट पर मासूम भावेश जब पिता से लिपटकर फूट-फूटकर रोया, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। अंतिम संस्कार में ब्रिगेडियर अमित वर्मा, मेजर अक्षय कुमार, एसडीएम शिवानी अग्रवाल, तहसीलदार जगन सिंह कुशवाह सहित प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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