
मुरैना और भिंड के कई गांवों में संचालित हैं नकली दूध-मावा बनाने की डेयरी, दतिया में भी फैल रहा कारोबार
अब्बास अहमद. भिंड।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुग्ध उत्पादन में कीर्तिमान बनाने के लिए देश की सराहना की है, लेकिन चंबल अंचल नकली और मिलावटी दूध का सिरमौर बन रहा है। चंबल के भिंड-मुरैना से रोजाना लाखों लीटर नकली-मिलावटी दूध देश के दूसरे राज्यों में सप्लाई होता है। दोनों जिलों के 100 से ज्यादा गांव में नकली और मिलावटी दूध की डेयरी संचालित हैं। भिंड में मंगलवार को अकोड़ा गांव में नकली दूध की डेयरी पर छापामार कार्रवाई हुई। टीम ने 35 सौ लीटर दूध, दूध बनाने का पाउडर, दूध बनाने के लिए तैयार घोल जब्त किया है। कम उत्पादन, ज्यादा खपत और कम लागत में कई गुना मुनाफा से यह कारोबार दिनों-दिन खूब फल-फूल रहा है।
ऐसे समझें मांग और आपूर्ति का अंतर
पशु पालन विभाग के उप संचालक डा. नवल सिंह सिकरवार के मुताबिक भिंड जिले में एक लाख 25 हजार गाय और चार लाख 22 हजार भैंस हैं। कुल पांच लाख 47 हजार मवेशी हैं। इनसे रोजाना 4 लाख 71 हजार 844 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। जिले में मेहगांव और दबोह में सरकारी चिलर प्लांट हैं। यहां से रोजाना 14 हजार लीटर दूध सांची के प्लांट पर जाता है। इसके अलावा प्राइवेट चिलर हैं, जहां से रोजाना करीब दो-तीन लाख लीटर दूध मालनपुर की फैक्टरी और देश के दूसरे राज्यों में जाता है। जिले में प्रति व्यक्ति 642 ग्राम दूध रोजाना चाहिए। अब खुद ही समझा जा सकता है कि जिले की 18 लाख की आबादी में यदि 15 लाख लोगों को भी इस औसत से दूध दिया जाए तो कितने लीटर दूध की जिले में ही आवश्यकता होगी।
100 किलो पाउडर, एक हजार लीटर दूध
मंगलवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने ऊमरी थाना पुलिस के साथ मिलकर अकोड़ा में कार्रवाई की है। यहां माल्ट पाउडर, 35 सौ लीटर दूध, दूध बनाने के लिए तैयार रखा घोल, घी और वनस्पति की खाली थैलियां मिली हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रीना बंसल ने डेयरी संचालक सहित दो लोगों पर धोखाधड़ी की एफआइआर कराई है। यहां बता दें, एक लीटर पाउडर से 10 लीटर दूध तैयार किया जाता है। यानी 100 किलो माल्ट माउडर से जिले में एक हजार लीटर दूध तैयार कर लिया जाता है। यही दूध टैंकरों में भरकर बड़ी फैक्टरियों और जिले के बाहर दूसरे राज्यों में सप्लाई के लिए भी भेजा जाता है। दूध में चिकनाई, झाग बढ़ाने रिफाइंड और डिटर्जेंट पाउडर उपयोग किया जाता है।
भिंड में नकली दूध के लिए यह गांव बदनाम
मेहगांव के दीखतपुरा, पचैरा, सोनी, सेंथरी, गितौर, अजनौधा, जरपुरा, सेपुरा, रबियापुरा, कनाथर, बिरगवां, कोंहार में दूध और मावा का कारोबार किया जाता है। अटेर के बलारपुरा, परा, चौम्हों, जमसारा, हुलापुरा, पिथनपुरा, कनैरा, कदौरा, प्रतापपुरा में बड़ी मात्रा में कारोबार किया जाता है। लहार के सिवावली, लालपुरा, रावतपुरा-सानी,असवार, इंगुई, दबोह, आलमपुर, असवार में कई जगह यह कारोबार किया जाता है। मौ के द्वारिकापुरी, रतवा रोड, जमदारा, घमोरी, तलमपुरा, देहगांव, झांकरी, खेरिया में दूध और मावा का कारोबार किया जाता है। भिंड शहरी और ग्रामीण में अटेर रोड, इटावा रोड, हाउसिंग कालोनी, जगराम नगर, आइटीआइ रोड, चरथर, दीनपुरा, ऊमरी, अकोड़ा, कनावर, मानपुरा, पावई, मुरलीपुरा, लावन, ऐंतहार नकली और मिलावटी दूध के लिए बदनाम हैं।
भिंड-मुरैना और दतिया में उत्पादन-खपत
- भिंड जिले में 5.47 लाख गाय-भैंस हैं। पशु पालन विभाग के मुताबिक इनसे रोजाना 4 लाख 71 हजार 844 लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिले में लोगों के घरों में सप्लाई के अलावा जिले से बाहर लाखों लीटर दूध जा रहा है। इससे पुष्ट होता है, जिले में बड़ी मात्रा में माल्ट पाउडर का इस्तेमाल कर नकली दूध बनाया जा रहा है।
- दतिया जिले में दुधारू पशुओं की संख्या लगभग एक लाख 86 हजार के करीब है। इनसे कुल दूध का उत्पादन प्रतिदिन एक लाख 60 हजार लीटर दूध प्राप्त होता है। जिले में सप्लाई के अलावा लाखों लीटर दूध जिले से बाहर फैक्टरियों, दूसरे राज्यों में जाता है। भिंड-मुरैना में सख्ती होने से यह कारोबार अब दतिया जिले में पैर पसार रहा है।
- मुरैना जिले में 7.98 लाख गाय-भैंस हैं, जिनसे हर रोज छह लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। लाखों लीटर दूध टैंकर, चिलर प्लांटो के माध्यम से महानगर व दूसरे राज्यों में जाता है। अनुमान है, जिले से सिंथेटिक दूध, मिलावटी मावा-पनीर का सालाना कारोबार 70 से 80 करोड़ रुपये का है।
वर्जनः
नकली और मिलावटी दूध-मावा बनाने वालों पर जिले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब हमारे यहां चलित लैब भी आ गई है। जिले में लगातार कार्रवाई की जाएगी।
डा. अजीत मिश्रा, सीएमएचओ, भिंड