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भिंड में करोड़ों का गेहूं घोटाला: दूसरों की जमीन पर फर्जी किसान बनकर बेचा 1.83 करोड़ रुपये का गेहूं, महिला समेत 4 जालसाजों पर एफआईआर

रिपोर्ट में पाया गया कि जिन सर्वे नंबरों और खसरों के आधार पर किसान पंजीयन कराया गया था, उनमें संबंधित आरोपी भूमिस्वामी के रूप में दर्ज ही नहीं थे।

By Manoj ShrivastavaEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 02:56:25 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 02:57:09 PM (IST)
भिंड में करोड़ों का गेहूं घोटाला: दूसरों की जमीन पर फर्जी किसान बनकर बेचा 1.83 करोड़ रुपये का गेहूं, महिला समेत 4 जालसाजों पर एफआईआर
एआई से बना चित्र।

HighLights

  1. 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं की हेराफेरी
  2. असली जमीन मालिकों को भनक तक नहीं
  3. बीएनएस की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। जिले के लहार क्षेत्र में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के गेहूं उपार्जन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। कनिष्ट आपूर्ति अधिकारी की शिकायत पर लहार थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन लोगों ने अन्य किसानों की जमीन को अपने नाम से पंजीकृत कर समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने का प्रयास किया।

कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुदगल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार कलेक्टर (खाद्य) कार्यालय से प्राप्त सूची के आधार पर किसान पंजीयनों की जांच कराई गई थी। जांच में सामने आया कि 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचा गया और इसके एवज में करीब एक करोड़ 83 लाख रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया।


मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों और खसरों की गहन जांच कराई। जांच के दौरान पटवारियों और राजस्व अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सत्यापन किया तथा पंचनामा तैयार किया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन सर्वे नंबरों और खसरों के आधार पर किसान पंजीयन कराया गया था, उनमें संबंधित आरोपी भूमिस्वामी के रूप में दर्ज ही नहीं थे।

किसानों को नहीं थी जानकारी

जांच में यह भी सामने आया कि जिन किसानों की जमीनों को उपार्जन पंजीयन में दर्शाया गया था, उनमें से कई किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं थी। प्रशासन को आशंका है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही उनके दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी पंजीयन कराया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि जमीन मालिकों से कोई लिखित अनुमति नहीं ली गई थी और न ही बटाई या अनुबंध से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किया गया था।

अलग-अलग समितियों के माध्यम से किया गया फर्जीवाड़ा

पुलिस के अनुसार लिधौरा निवासी संचिता पत्नी संजीव पाठक ने जैतपुरा (गुढ़ा) समिति के माध्यम से विभिन्न गांवों के 18 खसरों को जोड़कर किसान पंजीयन कराया था। वहीं लालपुरा निवासी गिरजा पत्नी संतोष तथा प्रतीक्षा पत्नी गोविंद ने निवसाई समिति के माध्यम से पंजीयन कराया। दबोह निवासी वीरसिंह तोमर ने दबोह, टोला और बरेई गांव के पांच सर्वे नंबरों के आधार पर पंजीयन करवाया था। जांच में सभी पंजीयन संदिग्ध और फर्जी पाए गए।

कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जांच रिपोर्ट और राजस्व अधिकारियों के पंचनामों के आधार पर चार आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है तथा अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।- सुनील कुमार मुदगल, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी एवं फरियादी