अब्बास अहमद, भिंड, World Cancer Day। देश के लोगों को मुंह के कैंसर से बचाने तंबाकू के खतरे बताने वाली सुनीता तोमर की आवाज मरने के 6 वर्ष बाद भी जीवित है। भिंड के भीम नगर की सुनीता तोमर को तंबाकू के सेवन से वर्ष 2013 में मुंह का कैंसर हुआ था। मुंबई में इलाज के बाद वह 2 वर्षों तक ठीक रहीं, लेकिन 1 अप्रैल 2015 को उनकी मौत हो गई थी। कैंसर से संघर्ष के दौरान वे देश में तंबाकू विरोधी अभियान की पोस्टर वुमन के रूप में सामने आईं थीं। आज भी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले उनकी तस्वीर दिखाई जाती है। यही वजह है कि मरने के बाद भी सुनीता कैंसर से लड़ रही हैं।

मरने से चार दिन पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

सुनीता तोमर ने मरने से चार दिन पहले 28 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तंबाकू पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने पत्र में तंबाकू अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने वाली संसदीय समिति के प्रमुख के उस बयान पर नाराजगी भी जताई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि तंबाकू से कैंसर के संबंध को साबित करने वाला कोई शोध देश में नहीं हुआ है। सुनीता ने अपने पत्र में कहा था कि 'मैं ये जानकर हैरान हूं कि इतने बड़े पदों पर बैठे लोग भी इतने गैर जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं।' तंबाकू से कैंसर होता है यह बताने के लिए उन्होंने खुद अपना उदहारण दिया था। इसके बाद 1 अप्रैल को उनकी मौत हो गई थी।

सुनीता ने देश को बताए तंबाकू के नुकसान

तंबाकू के नुकसान बताकर देशभर में जागृति लाने वाली एंटी टोबेको पोस्टर वुमन सुनीता तोमर ने वर्ष 2014 में मुंबई से यह अभियान शुरू किया था। सुनीता की 1999 में भीम नगर भिंड के रहने वाले बृजेंद सिंह तोमर से शादी हुई। शादी के बाद वो तंबाकू का सेवन करने लगी थीं। वर्ष 2013 में कैंसर हुआ था। उन्हें इलाज के लिए पहले ग्वालियर कैंसर अस्पताल फिर मुंबई के टाटा मेमोरियल में ले जाया गया था। यहां डॉक्टरों ने कैंसर का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद सुनीता की तबीयत ठीक हो गई थी। मुंबई में इलाज करने वाले डॉ. पंकज चतुर्वेदी की प्रेरणा से सुनीता ने तंबाकू के दुष्परिणाम बताकर देश में मुंह के कैंसर से लोगों का जीवन बचाने की मुहिम शुरू की।

सुनीता ने नवंबर 2014 से तंबाकू और गुटखे के खिलाफ अभियान शुरू किया था। उन्हें एंटी टोबेको पोस्टर गर्ल के रूप में देशभर में जाना जाता है। पति बृजेंद्र सिंह के मुताबिक 30 मार्च 2015 को सुनीता की तबीयत ज्यादा खराब हुई तो उन्होंने भिंड जिला अस्पताल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ रवीन्द्र चौधरी को दिखाया। सुधार नहीं हुआ तो ग्वालियर लेकर गए। ग्वालियर में 1 अप्रैल 2015 को सुबह 4 बजे उनकी मौत हो गई थी।

बेटे करते हैं लोगों को जागरूक

सुनीता तोमर के बेटे 21 वर्षीय ध्रुव तोमर और 18 वर्षीय गंधर्व सिंह तोमर तंबाकू के खिलाफ लोगों को जागरूक करते हैं। ध्रुव और गंधर्व का कहना है उन्होंने अपनी मां को कैंसर से लड़ते हुए देखा है। महसूस किया है कि तंबाकू से होने वाले नुकसान की भयावहता क्या होती है। इसीलिए वे अब मां के बाद भी उनकी मुहिम को जीवित रखे हुए हैं। ध्रुव और गंधर्व कहते हैं वे अपने स्तर पर ही लोगों को तंबाकू का सेवन नहीं करने के लिए जागरूक करते हैं। आस-पड़ोस के लोग उनको देखते हैं तो तंबाकू थूक देते हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि मां की इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। हालांकि उन्होंने कहा उनकी इस मुहिम को निरंतर रखने के लिए सरकार या शासन, प्रशासन की ओर से किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है। परिवार में दो बेटों के अलावा पति बृजेंद्र सिंह तोमर, सास कमलेश तोमर, स्वरूप सिंह तोमर भी हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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