
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नगर निगम में इंजीनियरों की पदस्थापना को लेकर अजीब स्थिति सामने आई है। एक ओर निगम के कई जोन और महत्वपूर्ण शाखाएं इंजीनियरों की कमी से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी ओर पदोन्नति के बाद 13 सहायक यंत्री बिना काम बैठे हैं।
इनमें से छह इंजीनियर तो पिछले करीब तीन महीने से बिना जिम्मेदारी के वेतन ले रहे हैं। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने अब तक इनकी पदस्थापना नहीं की है। इसका सीधा असर निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी पर पड़ रहा है।
दरअसल, निगम ने हाल ही में 13 सब इंजीनियरों को पदोन्नत कर सहायक यंत्री बनाया है। प्रतिनियुक्ति से आए तीन उपयंत्री भी सहायक यंत्री बने हैं। इसके बाद भी केंद्रीय कर्मशाला में पदस्थ विजय गोयल को छोड़कर अधिकांश पदोन्नत इंजीनियरों को अब तक जिम्मेदारी नहीं मिली है।
दूसरी तरफ प्रतिनियुक्ति पर नगर निगम में पदस्थ उपयंत्रियों सहित कुल 48 उपयंत्री वर्तमान में सहायक यंत्री का प्रभार संभाल रहे हैं। सबसे खराब स्थिति सिविल शाखा के जोन पांच, नौ और 11 की है।
यहां एक अगस्त से कोई सहायक यंत्री पदस्थ नहीं है। यानी बीते 11 दिन से ये जोन इंजीनियर के बिना चल रहे हैं। इसके बावजूद खाली बैठे इंजीनियरों को इन जोन में पदस्थ करने की जरूरत महसूस नहीं की गई।
यह कमी भी उस समय है जब पूरे शहर में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर आवासीय मकानों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के सर्वे का काम चल रहा है।
झील, उद्यान और प्रोजेक्ट जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में भी महज चार इंजीनियरों के भरोसे पूरे भोपाल का काम चल रहा है। इनमें से झील और उद्यान शाखा में तो वर्तमान में कार्यपालन यंत्री ही नहीं है।
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नगर निगम में इंजीनियरों की पदस्थापना को लेकर प्रक्रिया चल रही है। सहायक यंत्रियों को उनकी योग्यता और विभागीय आवश्यकता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। जिन जोन और शाखाओं में इंजीनियरों की कमी है, वहां भी आवश्यकता के अनुसार पदस्थापना की जाएगी। जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
- संस्कृति जैन, निगम आयुक्त, भोपाल