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ज्ञान भारतम् मिशन की खोज : बुरहानपुर में मिली 220 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि, आज भी घर में होती है पूजा

बुरहानपुर में संग्रहकर्ता परिवार को यह ग्रंथ विरासत में मिला था और आज भी इसे पवित्र धार्मिक ग्रंथ मानकर प्रतिदिन पूजा एवं भोग लगाया जाता है।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Fri, 10 Jul 2026 12:55:44 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Jul 2026 01:03:07 PM (IST)
ज्ञान भारतम् मिशन की खोज : बुरहानपुर में मिली 220 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि, आज भी घर में होती है पूजा
बुरहानपुर में ज्ञान भारतम् मिशन के सर्वेक्षण के दौरान विक्रम संवत 1862 (1805–06 ई.) की दुर्लभ पांडुलिपि सामने आई।

HighLights

  1. 220 वर्ष पुरानी हस्तलिखित टीका मिली
  2. संस्कृत और सुलेखन का अनूठा उदाहरण
  3. पवित्र धार्मिक ग्रंथ की होती है पूजा, लगता है भोग

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। बुरहानपुर निवासी आदित्य हरिकृष्ण शर्मा के पास से 220 वर्ष पुरानी टीका मिली है। विक्रम संवत 1862 (1805–1806 ईस्वी ) की हस्तलिखित यह टीका कागज पर अंकित है। यह संस्कृत व्याकरण और सुलेखन की दृष्टि से अद्वितीय है।

एकरूपी लेखनबद्धता एवं शब्दों की व्यवस्थित लिखावट से प्रतीत होता है कि यह किसी प्रशिक्षित विद्वान लेखक द्वारा लिखी गई थी।

राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों संग्रह

मध्य प्रदेश के पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण और संग्रहण कार्य के अंतर्गत यह टीका मिली है।

उन्होंने बताया कि इस पांडुलिपि के भाषा विन्यास एवं लिपि शैली से इस पर राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई देता है।

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पूर्वजों से प्राप्त हुआ ग्रंथ

संग्रहकर्ता परिवार के लोगों ने बताया कि यह ग्रंथ उन्हें उनकी परदादी स्वर्गीय देवकी बाई से प्राप्त हुआ था। यह परिवार आज भी इस हस्तलिखित पवित्र धार्मिक ग्रंथ को नित्य पूजन एवं भोग लगाते हैं।